भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का PSLV-C61 मिशन हाल ही में असफल रहा, जिससे वैज्ञानिक समुदाय और देशवासियों को गहरा झटका लगा है। यह मिशन भारत की तकनीकी क्षमता को और मजबूती देने के उद्देश्य से लॉन्च किया गया था, लेकिन तकनीकी खराबी के कारण यह निर्धारित कक्षा में उपग्रह को स्थापित करने में असफल रहा।
पूर्व इसरो वैज्ञानिक डॉ. एस. नागराजन ने इस असफलता पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “ऐसे मिशन असफल होने पर इसरो में एक बहुत ही व्यवस्थित प्रक्रिया शुरू होती है। सबसे पहले मिशन के सभी चरणों का डेटा एकत्र किया जाता है और उसका विश्लेषण किया जाता है। मिशन विफलता की जड़ तक पहुंचने के लिए एक विशेषज्ञ समिति बनाई जाती है।”
उन्होंने आगे कहा कि इसरो के पास विफलताओं से सीखकर अगली बार और बेहतर प्रदर्शन करने की परंपरा रही है। “हर असफलता हमें सुधार का अवसर देती है। इसरो की ताकत उसकी विश्लेषण क्षमता और लगातार सीखने की प्रक्रिया में है,” उन्होंने कहा।
ISRO अब मिशन की समीक्षा करेगा और यदि आवश्यक हो, तो डिज़ाइन या प्रणाली में संशोधन किया जाएगा। यह प्रक्रिया आने वाले महीनों में नए मिशनों की योजना और उनके क्रियान्वयन को प्रभावित कर सकती है, लेकिन देश की अंतरिक्ष यात्रा की गति को रोक नहीं सकेगी।
जनता और वैज्ञानिक समुदाय को इसरो पर पूरा विश्वास है कि वह जल्द ही इस असफलता से उबरकर एक और सफल मिशन के साथ लौटेगा।
