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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को अंतरिम जमानत प्रदान की है। प्रोफेसर पर सोशल मीडिया पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी कथित आपत्तिजनक पोस्ट साझा करने का आरोप है। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच दल (एसआईटी) के गठन का भी आदेश दिया है, जो इस प्रकरण में की गई ऑनलाइन गतिविधियों की विस्तृत जांच करेगा।
मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन बनाए रखना आवश्यक है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत आदेश का मतलब यह नहीं है कि आरोपी को पूरी तरह बरी कर दिया गया है।
‘ऑपरेशन सिंदूर’ हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना है, जिसे लेकर कई तरह की पोस्ट वायरल हुई हैं। कुछ पोस्टों पर नफरत फैलाने और धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप लगाए गए हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित जांच एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे एसआईटी की रिपोर्ट के आधार पर निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करें और अगली सुनवाई में अदालत को प्रगति रिपोर्ट सौंपें।
यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार को लेकर एक महत्वपूर्ण बहस का विषय बनता जा रहा है।
