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वॉशिंगटन डीसी, 4 जून 2025 – अमेरिकी अधिकारियों ने दो चीनी नागरिकों, युनकिंग जियान (33) और जुंयॉन्ग लियू (34), को ‘Fusarium graminearum’ नामक खतरनाक कवक की तस्करी के आरोप में गिरफ्तार किया है। यह कवक कृषि सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा माना जाता है और इसे ‘एग्रो-आतंकवाद’ के संभावित उपकरण के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
क्या है ‘Fusarium graminearum’?
‘Fusarium graminearum’ एक कवक है जो मुख्य रूप से गेहूं, जौ, मक्का और चावल की फसलों को प्रभावित करता है। यह ‘हेड ब्लाइट’ (Head Blight) नामक रोग का कारण बनता है, जिससे फसलों की उपज में भारी कमी आती है और उत्पाद की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है। इसके द्वारा उत्पादित मायकोटॉक्सिन्स जैसे डिओक्सिनिवालेनॉल (DON) और जिआरालेनोन (ZEN) मानव और पशुओं के लिए विषैले होते हैं, जिससे उल्टी, दस्त, यकृत की क्षति और प्रजनन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं।
गिरफ्तारी और आरोप
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, युनकिंग जियान, जो कि मिशिगन विश्वविद्यालय में शोध फेलो के रूप में कार्यरत हैं, और जुंयॉन्ग लियू, जो चीन में इसी कवक पर शोध कर चुके हैं, ने इस कवक को अवैध रूप से अमेरिका लाने की योजना बनाई। लियू ने जुलाई 2024 में डेट्रॉइट मेट्रोपॉलिटन एयरपोर्ट पर इस कवक को तस्करी करने का प्रयास किया था, जहाँ उनके पास से चार प्लास्टिक बैग में लाल रंग की वनस्पति सामग्री और एक छिपा हुआ चीनी भाषा में लिखा नोट मिला था। अधिकारियों ने यह भी पाया कि उनके फोन में एक वैज्ञानिक लेख था जिसका शीर्षक था “2018 प्लांट-पैथोजन वारफेयर अंडर चेंजिंग क्लाइमेट कंडीशंस”।
दोनों पर साजिश, तस्करी, झूठे बयान देने और वीजा धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए हैं। जियान को डेट्रॉइट की संघीय अदालत में पेश किया गया है, जबकि लियू को चीन भेज दिया गया है, क्योंकि अमेरिका और चीन के बीच प्रत्यर्पण संधि नहीं है।
राष्ट्रीय सुरक्षा पर प्रभाव
अमेरिकी न्याय विभाग के अनुसार, इस घटना से राष्ट्रीय सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न हुआ है। एफबीआई के निदेशक ने इसे ‘एग्रो-आतंकवाद’ के रूप में वर्गीकृत किया है, जो खाद्य सुरक्षा और कृषि प्रणालियों के लिए गंभीर जोखिम पैदा करता है। मिशिगन विश्वविद्यालय ने स्पष्ट किया है कि उसने इस शोध के लिए चीनी सरकार से कोई वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं की है और वह संघीय अधिकारियों के साथ सहयोग कर रहा है।
यह गिरफ्तारी अमेरिका में विदेशी शोधकर्ताओं और बायोसेक्योरिटी से संबंधित बढ़ती चिंताओं को उजागर करती है, विशेष रूप से उन मामलों में जहां संवेदनशील जैविक सामग्री की तस्करी या अवैध उपयोग की संभावना हो।
