Source BBC
भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में भारत की उपलब्धियों को एक नई ऊँचाई पर पहुँचाया है। वह Axiom Mission 4 (Ax-4) के पायलट के रूप में 10 जून 2025 को अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) के लिए उड़ान भरेंगे। यह मिशन भारतीय मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम ‘गगनयान’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
मिशन की विशेषताएँ
Axiom-4 मिशन, Axiom Space द्वारा आयोजित और NASA तथा ISRO के सहयोग से, फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से SpaceX के Falcon-9 रॉकेट द्वारा प्रक्षिप्त होगा। इसमें कुल चार अंतरिक्ष यात्री शामिल होंगे:
कमान्डर: पैगी व्हिटसन (USA)
पायलट: ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला (भारत)
मिशन विशेषज्ञ: स्लावोस्ज़ उज़नांस्की-विस्निव्स्की (पोलैंड)
मिशन विशेषज्ञ: तिबोर कपु (हंगरी)
यह मिशन लगभग 14 दिनों तक चलेगा, जिसमें वैज्ञानिक प्रयोग, शैक्षिक गतिविधियाँ और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा दिया जाएगा।
भारतीय योगदान
इस मिशन में भारत के सात प्रमुख माइक्रोग्रैविटी प्रयोग शामिल हैं, जो भारतीय अनुसंधान संस्थानों द्वारा डिज़ाइन किए गए हैं। इनमें शामिल हैं:
स्पेस में मूंग और मेथी जैसे भारतीय खाद्य फसलों की वृद्धि का अध्ययन।
माइक्रोग्रैविटी और अंतरिक्ष विकिरण के प्रभावों पर शोध।
स्पेस में तार्डिग्रेड्स (water bears) की जीवनशैली और जीन अभिव्यक्ति का विश्लेषण।
मांसपेशियों की मरम्मत में सहायक मेटाबोलिक सप्लीमेंट्स का परीक्षण।
मानव-मशीन इंटरफेस पर अध्ययन।
स्पेस में फसल उत्पादन के लिए सूक्ष्म शैवाल और साइनोबैक्टीरिया का प्रयोग।
यह प्रयोग भारत की अंतरिक्ष विज्ञान में बढ़ती भूमिका को दर्शाते हैं और भविष्य के अंतरिक्ष मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करेंगे।
शैक्षिक और सांस्कृतिक पहल
शुभांशु शुक्ला की यात्रा न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत भी है। उन्होंने लखनऊ के सिटी मोंटेसरी स्कूल के छात्रों के साथ संवाद स्थापित करने की योजना बनाई है, जिससे वे सीधे अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों को देख सकें और उनसे सीख सकें।
इसके अतिरिक्त, वह भारतीय संस्कृति का प्रतीक ‘जय’ नामक हंस को शून्य गुरुत्वाकर्षण संकेतक के रूप में अंतरिक्ष में ले जाएंगे, जो भारतीयता की पहचान को अंतरिक्ष में प्रस्तुत करेगा।
निष्कर्ष
ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला की यह अंतरिक्ष यात्रा भारत के लिए गर्व का विषय है और यह दर्शाता है कि भारत अंतरिक्ष अन्वेषण में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। यह मिशन न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भारतीय युवाओं को प्रेरित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देने में भी सहायक होगा।
इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम की दिशा और गति को निर्धारित करेगी, और यह सुनिश्चित करेगी कि भारत भविष्य में भी अंतरिक्ष अन्वेषण के क्षेत्र में अग्रणी बना रहे।
