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लॉस एंजेलिस, अमेरिका: अमेरिका के लॉस एंजेलिस शहर में इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) द्वारा की गई छापेमारी के विरोध में उग्र प्रदर्शन जारी हैं। हालात बिगड़ते देख ट्रंप प्रशासन ने कड़ा कदम उठाते हुए 2,000 सैनिकों की तैनाती कर दी है। प्रशासन का कहना है कि “दंगों और लूटपाट” को जल्द ही नियंत्रित किया जाएगा।
प्रमुख बिंदु:
ICE छापों का विरोध: सैकड़ों प्रदर्शनकारियों ने LA की सड़कों पर उतरकर ICE की कार्रवाई के खिलाफ प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि इन छापों से प्रवासी समुदाय भयभीत है और यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
हिंसा और आगजनी: कई इलाकों में प्रदर्शन हिंसक हो गए, दुकानों में लूटपाट की घटनाएं सामने आईं और कुछ जगहों पर वाहनों को आग लगा दी गई।
ट्रंप प्रशासन का बयान: व्हाइट हाउस की ओर से बयान जारी कर कहा गया कि “अराजकता बर्दाश्त नहीं की जाएगी, सेना कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए तैनात की गई है।”
2,000 सैनिक तैनात: नेशनल गार्ड के 2,000 जवानों को LA के संवेदनशील इलाकों में तैनात किया गया है। इसके साथ ही कर्फ्यू लगाने पर भी विचार किया जा रहा है।
मानवाधिकार संगठनों की निंदा: कई मानवाधिकार संगठनों ने ICE की कार्रवाइयों और सैन्य बल की तैनाती की आलोचना करते हुए कहा कि यह लोकतंत्र की भावना के खिलाफ है।
स्थानीय प्रशासन की चिंता: LA के मेयर ने भी हालात पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। साथ ही यह भी कहा कि प्रदर्शन करने का अधिकार है, लेकिन हिंसा बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका में प्रवासन नीतियों को लेकर पहले से ही व्यापक बहस चल रही है। ट्रंप प्रशासन की कठोर नीति और अब सैन्य तैनाती ने इस बहस को और तेज कर दिया है।
