SOURCE MoneyControl
लॉस एंजिल्स: अमेरिका में अप्रवासियों के खिलाफ इमिग्रेशन और कस्टम्स प्रवर्तन (ICE) के हमलों के विरोध में प्रदर्शन तेज़ हो गए हैं। इन विरोध प्रदर्शनों ने अमेरिका के कई शहरों को जकड़ लिया है, लेकिन हाल ही में ट्रंप प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए अपनी सेना की तैनाती का निर्णय लिया है। अब, इसके बाद, राष्ट्रीय गार्ड की तैनाती के बाद अमेरिकी मरीन को भी लॉस एंजिल्स की सड़कों पर तैनात किया गया है।
यह फैसला एलए के नागरिकों में चिंता का कारण बन गया है, जिनका मानना है कि प्रशासन विरोध प्रदर्शन को और अधिक हिंसक बना सकता है। प्रदर्शनकारी कहते हैं कि यह कदम उनके अधिकारों का उल्लंघन है और यह समाज में और अधिक तनाव पैदा करेगा। विरोध प्रदर्शनों का मुख्य कारण ICE द्वारा अप्रवासियों पर की जा रही कथित अत्याचार की घटनाएं हैं।
अमेरिकी मरीन और राष्ट्रीय गार्ड की तैनाती ने विरोध प्रदर्शनों में एक सैन्यीकरण की छवि उत्पन्न की है। यह कदम ट्रंप प्रशासन के विरोधियों द्वारा आलोचना का सामना कर रहा है। कई राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तैनाती केवल विरोध प्रदर्शन को और बढ़ावा दे सकती है और समाज में और अधिक हिंसा का कारण बन सकती है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा का विषय बन गया है कि क्या ट्रंप प्रशासन इस विरोध प्रदर्शन को युद्ध क्षेत्र में बदलने की कोशिश कर रहा है। कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन अपने राजनीतिक लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इस तरह की स्थिति उत्पन्न कर सकता है।
हालाँकि, ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यह कदम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बनाए रखने और सार्वजनिक सुरक्षा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है। लेकिन यह कदम अमेरिकी समाज में बढ़ती असहमति और आक्रोश को नकारा नहीं कर सकता।
इस स्थिति में आगे क्या होगा, यह देखना दिलचस्प होगा। लेकिन एक बात साफ है कि एलए में जो हो रहा है, वह केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक राजनीतिक और सामाजिक संघर्ष का प्रतीक बन चुका है।
