SOURCE India Today
नई दिल्ली: 18 जून, 2025 – कनाडा के पूर्व बैंक ऑफ कनाडा के गवर्नर और वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के जलवायु परिवर्तन वित्त के विशेष दूत मार्क कार्नी ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। इस बैठक के बाद, निज्जर हत्याकांड को लेकर उनकी टिप्पणी पर सबकी निगाहें टिकी हुई थीं। हालांकि, बैठक के बाद सार्वजनिक रूप से जारी बयानों में सीधे तौर पर निज्जर हत्याकांड का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया।
सूत्रों के अनुसार, बैठक का मुख्य ध्यान भारत और कनाडा के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने, विशेष रूप से हरित वित्त और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए सहयोग पर था। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की हरित ऊर्जा पहल और जलवायु परिवर्तन के लिए प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला, जबकि कार्नी ने कनाडा की विशेषज्ञता और निवेश क्षमता को रेखांकित किया।
यह गौरतलब है कि खालिस्तानी अलगाववादी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के बाद से भारत और कनाडा के संबंधों में तनाव बना हुआ है। कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने निज्जर की हत्या में भारत सरकार के एजेंटों की संभावित संलिप्तता का आरोप लगाया था, जिसे भारत ने दृढ़ता से खारिज कर दिया था। इस घटना के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध बिगड़ गए थे, व्यापार वार्ता निलंबित हो गई थी और दोनों देशों ने एक-दूसरे के राजनयिकों को निष्कासित कर दिया था।
मार्क कार्नी जैसे अंतरराष्ट्रीय स्तर के प्रभावशाली व्यक्ति की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी मुलाकात को दोनों देशों के संबंधों में एक महत्वपूर्ण घटना के रूप में देखा जा रहा था। यह उम्मीद की जा रही थी कि इस बैठक में पर्दे के पीछे निज्जर हत्याकांड पर भी चर्चा हो सकती है, हालांकि सार्वजनिक बयान इससे दूर रहे।
जब पत्रकारों ने कार्नी से इस विषय पर पूछा, तो उन्होंने सीधे तौर पर निज्जर हत्याकांड पर टिप्पणी करने से परहेज किया। उन्होंने द्विपक्षीय संबंधों के महत्व और भविष्योन्मुखी सहयोग पर जोर दिया। कार्नी ने कहा, “भारत और कनाडा के बीच एक मजबूत और बहुआयामी संबंध है। हमारी आज की बैठक बहुत रचनात्मक रही और हमने उन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जहां हम मिलकर काम कर सकते हैं, खासकर जलवायु वित्त और सतत विकास में।”
उन्होंने आगे कहा, “एक मजबूत आर्थिक साझेदारी दोनों देशों के लिए फायदेमंद है। हमें उन क्षेत्रों में अवसर तलाशने होंगे जहां हम आपसी विश्वास और समझ के साथ आगे बढ़ सकें।” उनकी टिप्पणियों से यह स्पष्ट संकेत मिला कि वे दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने के लिए आर्थिक और जलवायु सहयोग के रास्ते पर आगे बढ़ने को प्राथमिकता दे रहे थे, बजाय इसके कि वे सीधे विवादास्पद मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से चर्चा करें।
विश्लेषकों का मानना है कि कार्नी की टिप्पणी एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा थी। एक उच्च-स्तरीय अंतरराष्ट्रीय अधिकारी के रूप में, वे दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने और सहयोग के लिए एक मंच तैयार करने का प्रयास कर रहे थे। निज्जर हत्याकांड एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है, और सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी करने से स्थिति और बिगड़ सकती थी।
यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस बैठक के बाद भारत और कनाडा के संबंधों में क्या बदलाव आता है। हालांकि, कार्नी की यात्रा ने यह संकेत दिया कि दोनों देश संबंधों को पूरी तरह से टूटने से बचाने और सहयोग के नए रास्ते तलाशने के लिए तैयार हैं, भले ही संवेदनशील मुद्दे अभी भी पृष्ठभूमि में मौजूद हों। यह संभव है कि पर्दे के पीछे इन मुद्दों पर बातचीत जारी रहे, लेकिन सार्वजनिक मंच पर फिलहाल भविष्योन्मुखी एजेंडे को प्राथमिकता दी जा रही है।
