SOURCE CNBC TV18
नई दिल्ली: वैज्ञानिकों ने 99 मिलियन वर्ष पुराने एम्बर जीवाश्म में एक ऐसे कवक के शुरुआती संकेतों की खोज की है, जो आज के “ज़ोंबी” कवक के समान व्यवहार करता था। यह अविश्वसनीय खोज प्राचीन पारिस्थितिक तंत्रों में परजीवी कवक की भूमिका पर नई रोशनी डालती है।
यह जीवाश्म, जो म्यांमार में पाया गया था, में एक प्राचीन चींटी का सिर और शरीर के कुछ हिस्से शामिल हैं, जो एक विशेष प्रकार के कवक से संक्रमित प्रतीत होते हैं। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह कवक ओफियोकॉर्डिसेप्स (Ophiocordyceps) कवक के एक विलुप्त संबंधी प्रजाति का हो सकता है, जो आज भी कुछ कीड़ों को संक्रमित करता है और उन्हें “ज़ोंबी” में बदल देता है।
आज के ओफियोकॉर्डिसेप्स कवक संक्रमित चींटियों के व्यवहार को नियंत्रित करते हैं, जिससे वे एक विशिष्ट स्थान पर चढ़ने और मरने के लिए मजबूर हो जाते हैं। इसके बाद कवक चींटी के शरीर से बाहर निकलता है, अपने बीजाणुओं को फैलाने के लिए एक डंठल बनाता है। एम्बर में पाए गए जीवाश्म में भी इसी तरह की संरचनाएं देखी गई हैं, जो बताती हैं कि यह प्राचीन कवक भी अपने मेजबान को हेरफेर करने में सक्षम था।
इस खोज से न केवल कवक के विकासवादी इतिहास को समझने में मदद मिलती है, बल्कि यह भी पता चलता है कि प्रकृति में परजीवियों और मेजबानों के बीच जटिल संबंध कितने पुराने हैं। यह जीवाश्म इस बात का एक दुर्लभ प्रमाण है कि लाखों साल पहले भी ऐसे कवक मौजूद थे जो अपने मेजबानों को नियंत्रित करने की क्षमता रखते थे, जिससे उन्हें “ज़ोंबी” की तरह व्यवहार करने के लिए मजबूर किया जाता था।
वैज्ञानिक समुदाय में इस खोज को लेकर काफी उत्साह है, क्योंकि यह प्राचीन जीवन और उसके पारिस्थितिकी तंत्रों के बारे में हमारी समझ को और गहरा करेगा। यह शोध भविष्य में परजीवी-मेजबान संबंधों के अध्ययन के लिए नए रास्ते खोल सकता है।
