SOURCE MoneyControl
इस्लामाबाद: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष सलाहकार राणा सनाउल्लाह खान ने हाल ही में एक सनसनीखेज खुलासा किया है, जिसमें उन्होंने बताया कि जब भारत की ब्रह्मोस मिसाइल ने पाकिस्तान के नूर खान एयरबेस पर हमला किया था, तब पाकिस्तान के नेतृत्व के पास स्थिति को समझने और प्रतिक्रिया देने के लिए सिर्फ 30 सेकंड का समय था। उनके इस बयान से यह बात साफ हो गई है कि भारत के इस अचूक हमले ने इस्लामाबाद में कितनी खलबली मचा दी थी।
पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर के साथ एक इंटरव्यू में राणा सनाउल्लाह ने कहा, “भारत ने जब ब्रह्मोस मिसाइल से हमला किया और जो नूर खान एयरबेस पर आकर गिरी, तो पाकिस्तान की कियादत (नेतृत्व) के पास सिर्फ 30-40 सेकंड थे, इसका पता करने में कि ये जो ब्रह्मोस मिसाइल आ रही है, इसके साथ कोई एटम बम तो नहीं।” उनका यह बयान उस समय की भयावहता को दर्शाता है जब पाकिस्तान को यह डर सता रहा था कि भारत का हमला कहीं परमाणु हमले में न बदल जाए।
यह घटना 9-10 मई 2025 की रात को हुई थी, जब भारत ने “ऑपरेशन सिंदूर” के तहत पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों पर सटीक मिसाइल हमले किए थे। इनमें रावलपिंडी स्थित नूर खान एयरबेस भी शामिल था, जो पाकिस्तानी सेना मुख्यालय से कुछ ही किलोमीटर की दूरी पर है। यह एयरबेस पाकिस्तान के हवाई गतिशीलता कमांड का एक महत्वपूर्ण केंद्र है और यहां उसके साब एरीआई अर्ली वार्निंग सिस्टम, सी-130 ट्रांसपोर्टर और आईएल-78 ईंधन भरने वाले विमान जैसे महत्वपूर्ण हवाई संपत्ति मौजूद हैं।
शहबाज शरीफ और उनके उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी पहले स्वीकार किया था कि भारत के हमलों ने पाकिस्तान को चौंका दिया था। शरीफ ने बताया था कि पाकिस्तान 10 मई की सुबह जवाबी कार्रवाई की तैयारी कर रहा था, लेकिन भारत के ब्रह्मोस हमलों ने उनकी योजनाओं को विफल कर दिया। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने भी जियो न्यूज पर बातचीत में स्वीकार किया था कि भारत ने दो महत्वपूर्ण एयरबेस – नूर खान और शोरकोट एयरबेस – पर हमला किया था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय ब्रह्मोस मिसाइलें, जिनकी गति और सटीकता बेजोड़ है, पाकिस्तान की हवाई रक्षा प्रणालियों को भेदने में सफल रहीं। इस घटना ने भारत की बढ़ती रणनीतिक क्षमता और तीव्र प्रतिक्रिया क्षमताओं को उजागर किया है, साथ ही पाकिस्तान की रक्षा तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। सैटेलाइट इमेजरी से नूर खान एयरबेस पर हुए नुकसान की भी पुष्टि हुई है, जिसमें सैन्य परिवहन संपत्तियों का विनाश भी शामिल है। यह घटना दक्षिण एशिया में सैन्य तनाव में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और यह दर्शाता है कि भारत किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए कितनी तैयारी कर चुका है।
