Source MoneyControl
नई दिल्ली: भारतीय म्यूचुअल फंड उद्योग के लिए जून का महीना बेहद शानदार रहा। सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए होने वाला निवेश जून 2025 में रिकॉर्ड ₹27,269 करोड़ के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है। यह लगातार बढ़ती खुदरा भागीदारी और निवेशकों के बढ़ते विश्वास का प्रमाण है। इसके साथ ही, SIP रुकने के अनुपात (stoppage ratio) में भी उल्लेखनीय सुधार देखा गया है, जो निवेशकों की अपने निवेश को बनाए रखने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाता है।
एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, जून में SIP प्रवाह मई के ₹26,688 करोड़ से 2.2% अधिक रहा। यह पहली बार है जब मासिक SIP निवेश ₹27,000 करोड़ के आंकड़े को पार कर गया है। कुल म्यूचुअल फंड एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) भी बढ़कर ₹74.41 लाख करोड़ के ऐतिहासिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो मई के ₹72.20 लाख करोड़ से काफी अधिक है।
निवेशकों का बढ़ता विश्वास:
SIP रुकने का अनुपात, जो बंद हुए SIP खातों की संख्या को नए पंजीकृत SIP खातों की संख्या से मापता है, जून में सुधरकर 56.1% पर आ गया। यह आंकड़ा मई में लगभग 72% और अप्रैल में लगभग 300% था। यह सुधार दर्शाता है कि निवेशक अब अपने SIP को रोकने के बजाय उन्हें जारी रखने में अधिक रुचि दिखा रहे हैं, जो बाजार में मजबूत विश्वास और अनुशासित निवेश रणनीति की ओर बदलाव का संकेत है।
इक्विटी फंड में मजबूत वापसी:
इक्विटी म्यूचुअल फंड में भी जून में जोरदार उछाल देखा गया, जिसमें ₹23,587 करोड़ का शुद्ध प्रवाह हुआ। यह मई के ₹19,013 करोड़ से 24% अधिक है। यह लगातार 52वां महीना है जब ओपन-एंडेड इक्विटी स्कीमों में शुद्ध प्रवाह दर्ज किया गया है। स्मॉल-कैप और मिड-कैप फंडों में भी मजबूत निवेश जारी रहा, जबकि फ्लेक्सी-कैप फंडों ने भी निवेशकों को आकर्षित किया।
गोल्ड ईटीएफ और हाइब्रिड फंडों में भी उछाल:
गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) में भी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, जिसमें जून में ₹2,080.9 करोड़ का प्रभावशाली प्रवाह देखा गया, जो मई के ₹292 करोड़ से छह गुना से अधिक है। हाइब्रिड फंडों में भी लगातार वृद्धि देखी गई, जिसमें ₹23,223 करोड़ का निवेश हुआ।
ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भारतीय निवेशक अब म्यूचुअल फंड में SIP के माध्यम से अधिक व्यवस्थित और अनुशासित तरीके से निवेश कर रहे हैं, जिससे देश की वित्तीय बचत को बढ़ावा मिल रहा है। बाजार की अस्थिरता के बावजूद निवेशकों का यह मजबूत विश्वास और प्रतिबद्धता भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
