SOURCE MoneyControl
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन, 10 जुलाई, 2025 – अंतरिक्ष में भारत का नाम रोशन करते हुए, Axiom Mission 4 के Flight Day 15 पर, भारतीय मूल के अंतरिक्ष यात्री शुभ्रांशु शुक्ला और उनकी अंतरराष्ट्रीय टीम ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने सफलतापूर्वक पृथ्वी की 230 परिक्रमाएँ पूरी कर ली हैं, जो उनके इस ऐतिहासिक मिशन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
मिशन के अपने अंतिम दिनों की ओर बढ़ते हुए, शुभ्रांशु और उनकी टीम अब गहन वैज्ञानिक प्रयोगों और अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर अपने अनुभव को अधिकतम करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इन अंतिम पलों में वे जिन प्रमुख कार्यों और लक्ष्यों की ओर बढ़ रहे हैं, वे इस प्रकार हैं:
माइक्रोग्रैविटी अनुसंधान का समापन: टीम विभिन्न माइक्रोग्रैविटी प्रयोगों को अंतिम रूप दे रही है, जिनमें मानव शरीर पर अंतरिक्ष यात्रा के प्रभावों का अध्ययन, नए सामग्रियों का परीक्षण, और जैविक अनुसंधानों का समापन शामिल है। इन प्रयोगों से प्राप्त डेटा भविष्य की लंबी अवधि की अंतरिक्ष यात्राओं और पृथ्वी पर जीवन के लिए महत्वपूर्ण अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।
वैज्ञानिक डेटा का संग्रह और प्रेषण: अंतरिक्ष यात्री यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि उनके द्वारा एकत्र किए गए सभी वैज्ञानिक डेटा को ठीक से पैक और पृथ्वी पर प्रेषण के लिए तैयार किया जाए। यह डेटा बाद में विश्लेषण के लिए वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं को उपलब्ध कराया जाएगा।
ISS पर रखरखाव और स्थानांतरण: शुभ्रांशु और उनकी टीम ISS पर कुछ रखरखाव कार्यों में भी सहायता कर रही है और अपने अनुभवों और जानकारी को स्टेशन पर मौजूद अगले चालक दल के साथ साझा कर रही है। यह निरंतरता और सहयोग ISS के सुचारु संचालन के लिए महत्वपूर्ण है।
वापसी की तैयारी: चालक दल अब पृथ्वी पर अपनी सुरक्षित वापसी के लिए विस्तृत प्रक्रियाओं की समीक्षा कर रहा है, जिसमें कैप्सूल में सामान की व्यवस्था, सीटलाइनर समायोजन, और डीऑर्बिट तथा लैंडिंग के लिए अंतिम चेकलिस्ट शामिल हैं।
शुभ्रांशु शुक्ला ने इस अवसर पर कहा, “यह एक अविश्वसनीय अनुभव रहा है। हमने जो कुछ सीखा है और जो वैज्ञानिक प्रगति की है, वह हमारे लिए और भविष्य की पीढ़ियों के लिए बहुत मायने रखती है। हम अपने अंतिम दिनों का हर पल सदुपयोग कर रहे हैं और सुरक्षित रूप से घर लौटने के लिए उत्सुक हैं।”
Axiom Mission 4 ने निजी अंतरिक्ष यात्रा और वैज्ञानिक अनुसंधान के क्षेत्र में नए मानक स्थापित किए हैं। शुभ्रांशु शुक्ला और उनकी टीम की उपलब्धियाँ न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक अंतरिक्ष समुदाय के लिए भी गर्व का विषय हैं। उनकी वापसी की घड़ी करीब आ रही है और दुनिया बेसब्री से उनके अनुभवों को जानने का इंतजार कर रही है।
