SOURCE The Hindu
नई दिल्ली: भारत निर्वाचन आयोग (ECI) अगले महीने से देशभर में मतदाता सूची के व्यापक पुनरीक्षण (वोटर लिस्ट रिवीजन) की संभावना के मद्देनजर अपनी फील्ड मशीनरी को सक्रिय कर दिया है। यह कदम मतदाता सूचियों को अधिक सटीक और त्रुटिहीन बनाने के आयोग के प्रयासों का हिस्सा है।
हाल ही में, सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को ‘संवैधानिक जनादेश’ बताते हुए बिहार में इसे जारी रखने की अनुमति दी थी। इसी के मद्देनजर, चुनाव आयोग अब इस प्रक्रिया को पूरे देश में लागू करने की तैयारी में है। आयोग का लक्ष्य है कि कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और किसी भी अपात्र व्यक्ति का नाम इसमें शामिल न हो।
इस पुनरीक्षण अभियान के तहत, बूथ-स्तरीय अधिकारी (BLOs) घर-घर जाकर सत्यापन करेंगे। यह प्रक्रिया बिहार में पहले से ही चल रही है, जहां कथित तौर पर बड़ी संख्या में ऐसे व्यक्तियों की पहचान की गई है जो विदेशी नागरिक हो सकते हैं। आयोग ने स्पष्ट किया है कि केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता सूची में शामिल किए जाएंगे।
हालांकि, विपक्षी दलों ने इस कवायद की टाइमिंग और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं, खासकर बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए। उनका आरोप है कि इससे वैध नागरिकों को उनके मताधिकार से वंचित किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने इस संबंध में सुनवाई करते हुए आधार कार्ड, वोटर आईडी और राशन कार्ड जैसे दस्तावेजों को सत्यापन के लिए वैध मानने का सुझाव दिया है।
चुनाव आयोग ने दोहराया है कि वह यह सुनिश्चित करेगा कि किसी भी व्यक्ति को उचित सुनवाई और नोटिस दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाएगा। इस पुनरीक्षण अभियान के तहत, नए योग्य मतदाताओं को शामिल किया जाएगा, जबकि मृत, स्थानांतरित या अनुपस्थित मतदाताओं के नामों को हटाया जाएगा।
अंतिम निर्णय 28 जुलाई के बाद होने की संभावना है, जब बिहार एसआईआर मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में फिर से होगी। यह पुनरीक्षण अभियान 2026 में होने वाले असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भी महत्वपूर्ण है।
