Source The Economics Times
नई दिल्ली: भारत ने हाल ही में अपनी स्वदेशी हाइपरसोनिक मिसाइल ‘विष्णु’ (ET-LDHCM – Extended Trajectory Long Duration Hypersonic Cruise Missile) का सफलतापूर्वक परीक्षण कर अपनी रक्षा क्षमताओं में एक बड़ी छलांग लगाई है। इस अभूतपूर्व उपलब्धि ने न केवल देश को हाइपरसोनिक मिसाइल तकनीक वाले चुनिंदा देशों की कतार में खड़ा कर दिया है, बल्कि एक अमेरिकी सांसद ने भी इस कदम को एशिया में शांति बनाए रखने में महत्वपूर्ण बताया है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) द्वारा ‘प्रोजेक्ट विष्णु’ के तहत विकसित इस मिसाइल ने 14 जुलाई को अपना परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया। यह मिसाइल मैक 8 (लगभग 11,000 किलोमीटर प्रति घंटा) की अविश्वसनीय गति से उड़ान भरने में सक्षम है, जो भारत की मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल से लगभग तीन गुना अधिक है। इसकी मारक क्षमता 1500 किलोमीटर तक है, जिससे यह दुश्मनों के हवाई रक्षा प्रणालियों के लिए लगभग अजेय बन जाती है।
मिसाइल की खासियतों में इसकी कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता, इन-फ्लाइट पैंतरेबाज़ी और स्क्रैमजेट इंजन का उपयोग शामिल है, जो इसे रडार से बचने में मदद करता है। यह 1000 से 2000 किलोग्राम तक के पारंपरिक या परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम है और इसे जमीन, समुद्र और हवा तीनों से लॉन्च किया जा सकता है, जो भारतीय सेना के लिए इसकी सामरिक उपयोगिता को बढ़ाता है।
इस सफल परीक्षण के बाद, एक अमेरिकी सांसद ने भारत की इस उपलब्धि की सराहना करते हुए कहा कि यह एशिया क्षेत्र में शक्ति संतुलन को बनाए रखने और शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताएं क्षेत्रीय स्थिरता के लिए आवश्यक हैं।
भारत का ‘प्रोजेक्ट विष्णु’ एक महत्वाकांक्षी कार्यक्रम है जिसका उद्देश्य अत्याधुनिक हाइपरसोनिक मिसाइल प्रणालियों का विकास करना है। इस मिसाइल के सफल परीक्षण ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत अब उन कुछ देशों में शामिल हो गया है जिनके पास यह अत्यधिक उन्नत तकनीक है। यह उपलब्धि ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत रक्षा विनिर्माण में आत्मनिर्भरता की दिशा में भी एक बड़ा कदम है।
विश्लेषकों का मानना है कि ‘विष्णु’ मिसाइल का यह परीक्षण भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करेगा और यह क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे का सामना करने के लिए देश की तैयारी को दर्शाता है। यह विकास ऐसे समय में आया है जब वैश्विक और क्षेत्रीय भू-राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और ऐसे में भारत की यह शक्ति एशिया की सुरक्षा में एक नया आयाम जोड़ेगी।
