नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के व्यापार सलाहकार, पीटर नवारो, ने भारत पर रूस से कच्चे तेल की खरीद जारी रखने के लिए कड़ी आलोचना की है। उन्होंने भारत को “क्रेमलिन के लिए लॉन्ड्रोमैट” बताया और कहा कि भारत को रूसी तेल की कोई ज़रूरत नहीं है। उनके अनुसार, भारत इस व्यापार से केवल मुनाफा कमा रहा है और यूक्रेन में चल रहे युद्ध को हवा दे रहा है।
नवारो ने कहा कि “भारत को इस रक्तपात में अपनी भूमिका को पहचानने की ज़रूरत नहीं लगती। यह सिर्फ़ चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के करीब जा रहा है।” उन्होंने आगे कहा कि रूस से तेल की यह खरीद एक “रिफाइनिंग मुनाफाखोरी की योजना” है।
नए टैरिफ़ और भारत पर प्रभाव
नवारो ने यह भी बताया कि 27 अगस्त से भारत पर 50% का नया टैरिफ़ (शुल्क) लगाया जाएगा। इसमें से 25% टैरिफ़ व्यापार में “धोखाधड़ी” के लिए है, जबकि बाकी 25% रूसी तेल खरीदने के लिए लगाया गया है। नवारो का मानना है कि इससे अमेरिकी श्रमिकों और व्यवसायों को नुकसान हो रहा है, क्योंकि भारत अमेरिका से पैसे कमाता है और फिर उसी पैसे से रूसी तेल खरीदता है, जिससे रूस को हथियार बनाने और यूक्रेन के लोगों को मारने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा कि यह पूरी स्थिति “पागलपन” है।
“सड़क शांति की ओर दिल्ली से होकर जाती है”
अपनी आलोचना के बावजूद, नवारो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें “एक महान नेता” बताया। उन्होंने कहा, “मैं भारत से प्यार करता हूं।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि “कई मायनों में, शांति की सड़क नई दिल्ली से होकर जाती है।”
भारत का जवाब
भारत ने अमेरिका के इन आरोपों को खारिज कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बाजार के कारकों के आधार पर तेल खरीदता है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत अमेरिका से भी तेल खरीदता है और इस मात्रा में वृद्धि हुई है। भारत ने यह भी तर्क दिया है कि उसे अनुचित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है, जबकि अमेरिका और यूरोपीय संघ जैसे अन्य देश भी रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखे हुए हैं।
