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अफगानिस्तान में एक भीषण भूकंप ने जनजीवन को हिला कर रख दिया है। यह भूकंप रविवार तड़के आया और इसकी तीव्रता 6.4 रिक्टर स्केल मापी गई। झटके इतने तेज़ थे कि कई इलाकों में घर जमींदोज़ हो गए और भारी जनहानि की आशंका जताई जा रही है।
प्रभावित क्षेत्र
भूकंप का केंद्र अफगानिस्तान के उत्तरी हिस्से में बताया जा रहा है। सबसे ज़्यादा असर बदख्शान और तखार प्रांतों में देखने को मिला, जहां कई गांव मलबे में तब्दील हो गए। स्थानीय प्रशासन के अनुसार, भूकंप के झटके पड़ोसी ताजिकिस्तान और पाकिस्तान में भी महसूस किए गए।
जनहानि और राहत कार्य
अब तक की जानकारी के अनुसार सैकड़ों लोग घायल हुए हैं और मृतकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पतालों में भीड़ उमड़ आई है और स्वास्थ्य सेवाएं दबाव में हैं। अफगानिस्तान की अंतरिम सरकार ने तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिए हैं।
राहतकर्मियों के साथ-साथ स्थानीय लोग भी मलबे से लोगों को निकालने में लगे हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियों से मदद की गुहार लगाई गई है।
इमारतों को भारी नुकसान
भूकंप के कारण पुराने घर और इमारतें सबसे पहले ढह गईं। कई मस्जिदें, स्कूल और छोटे अस्पताल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। बिजली और संचार व्यवस्था भी कई जगहों पर ठप पड़ी है, जिससे बचाव कार्य में दिक्कत आ रही है।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र ने स्थिति पर चिंता जताई है और प्रभावित लोगों की सहायता के लिए मानवीय मदद भेजने का आश्वासन दिया है। भारत और अन्य पड़ोसी देशों ने भी सहायता भेजने की तत्परता दिखाई है।
आगे की चुनौती
अफगानिस्तान पहले से ही आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। ऐसे में यह प्राकृतिक आपदा वहां की स्थिति को और बदतर बना सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि आफ्टरशॉक्स (भूकंप के बाद आने वाले झटके) का खतरा अभी बना हुआ है, इसलिए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।
यह भूकंप एक बार फिर दिखाता है कि भूकंपीय दृष्टि से असुरक्षित क्षेत्रों में इन्फ्रास्ट्रक्चर और तैयारी की कितनी अहमियत है।
