Source The Indian Express
नई दिल्ली: यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से लगातार उस पर आर्थिक पाबंदियाँ लगाई जा रही हैं। इस क्रम में, यूरोपीय संघ (EU) ने एक बार फिर रूस की अर्थव्यवस्था को पंगु बनाने के लिए नए प्रतिबंधों पर विचार करना शुरू कर दिया है। इन नए प्रतिबंधों में रूस के प्रमुख बैंकों और तेल व्यापार को निशाना बनाया जाएगा।
आर्थिक दबाव की रणनीति
यूरोपीय संघ के अधिकारी रूस के खिलाफ 19वें दौर के प्रतिबंधों पर काम कर रहे हैं। इन उपायों का मकसद रूस की अर्थव्यवस्था पर और ज़्यादा दबाव बनाना है ताकि यूक्रेन में युद्ध खत्म हो। ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार, इस नए पैकेज में कई रूसी बैंकों और ऊर्जा कंपनियों पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। इसके अलावा, रूस के भुगतान और क्रेडिट कार्ड सिस्टम, और क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंजों को भी निशाना बनाया जा सकता है।
अमेरिका के साथ मिलकर कार्रवाई की योजना
यह भी खबर है कि EU इस बार अमेरिका के साथ मिलकर कदम उठाने की योजना बना रहा है। अमेरिकी अधिकारी भी रूस के तेल टैंकर बेड़े और ऊर्जा कंपनियों जैसे रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहे हैं। इस संयुक्त कार्रवाई से रूस की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ने की उम्मीद है।
पिछले प्रतिबंधों का प्रभाव
रूस पर पहले भी कई कड़े प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं, जिसमें उसके बैंकों को SWIFT अंतर्राष्ट्रीय भुगतान प्रणाली से हटाना और तेल-गैस आयात पर प्रतिबंध लगाना शामिल है। हालांकि, रूस ने चीन और भारत जैसे देशों में नए बाजार ढूंढकर इन प्रतिबंधों के असर को कुछ हद तक कम कर लिया है। लेकिन अगर ये नए प्रतिबंध लागू होते हैं तो रूस के लिए अपनी अर्थव्यवस्था को बचाना और मुश्किल हो जाएगा।
