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नींद की कमी से डिमेंशिया का खतरा 40% तक बढ़ सकता है: मेयो क्लिनिक

Source Daily science

नई दिल्ली: एक चौंकाने वाले नए अध्ययन में, मेयो क्लिनिक के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है कि पर्याप्त नींद न लेना, जिसे आमतौर पर हम नजरअंदाज कर देते हैं, डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के जोखिम को 40% तक बढ़ा सकता है। यह निष्कर्ष उन लोगों के लिए एक गंभीर चेतावनी है जो अपनी व्यस्त दिनचर्या के कारण अक्सर रात की नींद का त्याग करते हैं।

अध्ययन, जो हाल ही में ‘न्यूरोलॉजी’ नामक एक प्रतिष्ठित पत्रिका में प्रकाशित हुआ, में पाया गया कि जो लोग रात में 6 घंटे से कम सोते थे, उनमें डिमेंशिया के शुरुआती लक्षण दिखने की संभावना उन लोगों की तुलना में बहुत अधिक थी जो 7-8 घंटे की पर्याप्त नींद लेते थे। शोधकर्ताओं ने यह भी बताया कि नींद की कमी से मस्तिष्क में ‘अमाइलॉइड-बीटा’ (Amyloid-beta) और ‘टाऊ’ (Tau) नामक प्रोटीन का संचय बढ़ जाता है, जो अल्जाइमर रोग और अन्य प्रकार के डिमेंशिया के प्रमुख कारण माने जाते हैं।

डॉ. मिशेल जी. स्टेंजा, मेयो क्लिनिक में इस अध्ययन के प्रमुख लेखक ने कहा, “हमारी खोज इस बात को उजागर करती है कि नींद का हमारे संज्ञानात्मक स्वास्थ्य पर कितना गहरा प्रभाव पड़ता है। यह सिर्फ थकान दूर करने का एक साधन नहीं है, बल्कि मस्तिष्क को साफ करने और मरम्मत करने की एक प्रक्रिया भी है।” उन्होंने आगे कहा, “अच्छी नींद से मस्तिष्क में बनने वाले जहरीले प्रोटीन को साफ करने में मदद मिलती है, जिससे डिमेंशिया का खतरा कम होता है।”

यह अध्ययन इस बात पर भी जोर देता है कि नींद की गुणवत्ता भी मात्रा जितनी ही महत्वपूर्ण है। अनियमित नींद, खर्राटे और नींद के दौरान सांस लेने में दिक्कत (स्लीप एपनिया) जैसी समस्याएं भी डिमेंशिया के खतरे को बढ़ा सकती हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस शोध के निष्कर्षों को गंभीरता से लेने की जरूरत है। वे सलाह देते हैं कि लोगों को अपने सोने के पैटर्न पर ध्यान देना चाहिए और पर्याप्त आराम सुनिश्चित करना चाहिए। स्मार्टफोन और टीवी से दूर रहना, एक नियमित सोने का समय तय करना और सोने से पहले कैफीन का सेवन न करना जैसी आदतें नींद की गुणवत्ता में सुधार कर सकती हैं।

यह अध्ययन भविष्य में डिमेंशिया के इलाज और रोकथाम के लिए नई दिशाएं खोल सकता है। अब यह स्पष्ट है कि स्वस्थ जीवनशैली के लिए सिर्फ संतुलित आहार और व्यायाम ही पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि अच्छी और पर्याप्त नींद भी एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

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