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अंडमान सागर में विशाल गैस भंडार की घोषणा, ऊर्जा को लेकर भू-राजनीतिक खींचतान के बीच भारत का बड़ा कदम

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नई दिल्ली: ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में भारत ने एक बड़ी सफलता हासिल की है। केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने अंडमान सागर में प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार की खोज की घोषणा की है। इस खोज को देश की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गेम चेंजर माना जा रहा है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक स्तर पर ऊर्जा संसाधनों को लेकर भू-राजनीतिक खींचतान जारी है।

इस खोज ने अंडमान बेसिन के प्राकृतिक गैस से समृद्ध होने की पुरानी धारणा की पुष्टि कर दी है। मंत्री पुरी ने बताया कि अंडमान द्वीप समूह के पूर्वी तट से लगभग 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ‘श्री विजयपुरम-II कुएं’ में प्राकृतिक गैस के संकेत मिले हैं। शुरुआती परीक्षणों में गैस के नमूनों में 87% मीथेन की पुष्टि हुई है।

हालांकि, गैस भंडार के आकार और व्यावसायिक व्यवहार्यता का सत्यापन आने वाले महीनों में होगा, लेकिन हाइड्रोकार्बन की उपस्थिति स्थापित होना एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह खोज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित गहरे समुद्र अन्वेषण मिशन के तहत की गई है, जिसका उद्देश्य देश के हाइड्रोकार्बन भंडार का पूर्ण उपयोग करना है।

भू-राजनीतिक महत्व

यह खोज भारत के लिए न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक दृष्टिकोण से भी बेहद महत्वपूर्ण है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर करता है। अंडमान सागर में इतना बड़ा भंडार मिलने से आयात पर निर्भरता कम हो सकती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी।

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का क्षेत्र मलक्का जलडमरूमध्य के करीब है, जो दुनिया के समुद्री व्यापार का एक महत्वपूर्ण मार्ग है। ऐसे में इस क्षेत्र में ऊर्जा संसाधनों पर नियंत्रण भारत की भू-राजनीतिक स्थिति को और मजबूत करेगा, जिससे वैश्विक कूटनीति में देश की भूमिका बढ़ेगी।

मंत्री पुरी ने इस खोज की तुलना दक्षिण अमेरिकी देश गुयाना में हुई विशाल खोज से करते हुए इसे भारत का ‘गुयाना मोमेंट’ बताया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह भंडार अनुमान के मुताबिक निकला, तो यह भारत की अर्थव्यवस्था को 20 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने में सहायक हो सकता है। यह सफलता भारत को ऊर्जा आयातक देश से ऊर्जा उत्पादक देश में बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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