Source The Hindu
नई दिल्ली, 29 सितंबर: औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (Index of Industrial Production – IIP) की वृद्धि दर अगस्त 2025 में घटकर 4% रह गई है। जुलाई में यह दर 6.1% थी। उपभोक्ता-सामान से जुड़े क्षेत्रों में मांग कमजोर रहने के चलते समग्र औद्योगिक गतिविधि पर दबाव देखने को मिला।
केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (CSO) द्वारा जारी ताज़ा आंकड़ों के अनुसार, खनन क्षेत्र ने अगस्त में 7.2% की वृद्धि दर्ज की, जबकि बिजली उत्पादन में 6.4% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र, जिसका IIP में 77% से अधिक योगदान है, केवल 3.1% की वृद्धि दर्ज कर सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि फेस्टिव सीजन से पहले उपभोक्ता मांग में सुस्ती और निर्यात ऑर्डर्स में गिरावट का असर उत्पादन गतिविधियों पर पड़ा है। उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं (consumer durables) की श्रेणी में अगस्त में 2.5% की गिरावट दर्ज की गई, जबकि गैर-टिकाऊ वस्तुओं की वृद्धि भी केवल 1.8% तक सीमित रही।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि उच्च ब्याज दरों और ग्रामीण मांग में सुधार की धीमी गति ने उपभोक्ता-सामान उद्योग पर दबाव बनाया है। वहीं, निवेश से जुड़े क्षेत्रों जैसे कि बुनियादी ढांचा और कैपिटल गुड्स में हल्की मजबूती देखने को मिली, जिससे IIP को आंशिक सहारा मिला।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि आने वाले महीनों में त्योहारों की मांग और सरकारी पूंजीगत व्यय (capex) से औद्योगिक गतिविधि में सुधार हो सकता है। हालांकि, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और निर्यात मांग की कमजोरी फिलहाल चुनौतियां बनी रहेंगी।
