Source BBC
नई दिल्ली: भारत के सबसे प्रभावशाली हिंदू राष्ट्रवादी संगठन ने इस वर्ष अपने 100 वर्ष पूरे कर लिए हैं। संगठन ने शताब्दी वर्ष को ऐतिहासिक अवसर बताते हुए देशभर में बड़े पैमाने पर कार्यक्रमों की घोषणा की है।
यह संगठन, जिसकी स्थापना 1925 में हुई थी, पिछले एक सदी में भारतीय राजनीति, समाज और सांस्कृतिक जीवन पर गहरा प्रभाव डाल चुका है। शुरुआती दिनों में सीमित दायरे से शुरू हुआ यह संगठन आज विश्व के सबसे बड़े स्वयंसेवी संगठनों में गिना जाता है।
शताब्दी समारोह के तहत देशभर में सांस्कृतिक यात्राएं, सेमिनार, पुस्तक प्रकाशन, सामाजिक सेवा शिविर और राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। संगठन ने दावा किया है कि इसके कार्यकर्ता अब लाखों की संख्या में गांव-गांव और शहर-शहर तक सक्रिय हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस संगठन ने भारत की राजनीति की दिशा और विमर्श को गहराई से प्रभावित किया है। कई दशकों तक परोक्ष भूमिका निभाने के बाद आज यह संगठन न केवल सामाजिक स्तर पर, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी निर्णायक शक्ति के रूप में देखा जाता है।
प्रधानमंत्री और कई केंद्रीय मंत्रियों ने शताब्दी वर्ष पर संगठन को बधाई दी और इसे “भारतीय संस्कृति व राष्ट्र निर्माण की आधारशिला” बताया। वहीं, आलोचकों का कहना है कि संगठन की विचारधारा ने समाज को ध्रुवीकृत करने का भी काम किया है।
संगठन के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने कहा कि शताब्दी समारोह सिर्फ भूतकाल की उपलब्धियों का स्मरण नहीं, बल्कि आने वाले 100 वर्षों की नई दिशा तय करने का अवसर है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संगठन “सशक्त भारत” के अपने दृष्टिकोण पर आगे बढ़ता रहेगा।
शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम अगले 12 महीनों तक जारी रहेंगे और देशभर में लाखों लोगों की भागीदारी की उम्मीद है।
