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हाल ही में एक अध्ययन में यह सामने आया है कि मुँह में मौजूद कुछ बैक्टीरिया और फंगस पैंक्रियाटिक कैंसर (पेट का कैंसर) के जोखिम को तीन गुना तक बढ़ा सकते हैं। यह शोध न्यूयॉर्क विश्वविद्यालय के लैंगोन हेल्थ और पर्लमटर कैंसर सेंटर द्वारा किया गया है, जो जामा ऑन्कोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है।
मुँह के बैक्टीरिया और फंगस से कैंसर का खतरा
अध्ययन में 1.22 लाख लोगों के लार के नमूनों का विश्लेषण किया गया। इसमें 445 पैंक्रियाटिक कैंसर के मरीजों और 445 स्वस्थ व्यक्तियों के नमूने शामिल थे। विश्लेषण से पता चला कि मुँह में मौजूद 27 बैक्टीरिया और फंगस की प्रजातियाँ पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम को 3.5 गुना तक बढ़ा सकती हैं।
प्रमुख बैक्टीरिया और फंगस
अध्ययन में तीन प्रमुख बैक्टीरिया की पहचान की गई है जो पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं:
पोरफिरोमोनास जिंजिवालिस (Porphyromonas gingivalis)
एयूबैक्टीरियम नोडेटम (Eubacterium nodatum)
पार्विमोनास माइक्रा (Parvimonas micra)
इसके अलावा, कैंडिडा (Candida) जैसे फंगस भी कैंसर के जोखिम से जुड़े पाए गए हैं।
मुँह की सफाई से कैंसर के जोखिम में कमी
विशेषज्ञों का कहना है कि मुँह की अच्छी सफाई से न केवल मसूड़ों की बीमारी से बचा जा सकता है, बल्कि पैंक्रियाटिक कैंसर जैसे गंभीर रोगों के जोखिम को भी कम किया जा सकता है। डॉ. जियॉंग आंह, अध्ययन की सह-लेखिका, ने कहा कि मुँह के बैक्टीरिया और फंगस की पहचान से कैंसर के जोखिम का आकलन किया जा सकता है।
निष्कर्ष
यह अध्ययन यह दर्शाता है कि मुँह की सफाई केवल दांतों की सेहत के लिए नहीं, बल्कि पूरे शरीर की सेहत के लिए महत्वपूर्ण है। मुँह में मौजूद बैक्टीरिया और फंगस पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम को बढ़ा सकते हैं, इसलिए नियमित रूप से मुँह की सफाई और दंत चिकित्सक से जांच करवाना आवश्यक है।
