Source The Hindu
पटना बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) – LJP(RV) के नेता चिराग पासवान की स्थिति को अभूतपूर्व रूप से मजबूत कर दिया है। गठबंधन के भीतर कई आशंकाओं के बावजूद, चिराग पासवान की पार्टी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए न केवल NDA की ऐतिहासिक जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया, बल्कि खुद को गठबंधन के एक प्रमुख और भरोसेमंद स्तंभ के रूप में स्थापित किया।
चमत्कारिक स्ट्राइक रेट
इस चुनाव में, LJP(RV) ने NDA के सीट-बंटवारे समझौते के तहत मिली 28 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे थे। शुरुआती रुझानों और अंतिम परिणामों के अनुसार, पार्टी ने इनमें से 19 से अधिक सीटों पर जीत दर्ज की या बढ़त बनाए रखी, जो कि लगभग 70% से अधिक का स्ट्राइक रेट है। 2020 के पिछले विधानसभा चुनाव में केवल एक सीट जीतने वाली पार्टी के लिए यह प्रदर्शन किसी चमत्कार से कम नहीं है।
चिराग पासवान के नेतृत्व में LJP(RV) का यह प्रदर्शन न केवल उनकी चुनावी ताकत को दर्शाता है, बल्कि यह भी साबित करता है कि उनका ‘बिहार फर्स्ट, बिहारी फर्स्ट’ का नारा और युवा नेतृत्व मतदाताओं के बीच स्वीकार्य हो रहा है।
NDA के लिए ‘हनुमान’ साबित हुए
2020 के चुनावों में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल (यूनाइटेड) (JDU) के खिलाफ अकेले चुनाव लड़कर, चिराग पासवान ने JDU के वोट शेयर को नुकसान पहुँचाया था। लेकिन 2024 के लोकसभा चुनावों में 100% स्ट्राइक रेट के साथ NDA में मजबूत वापसी के बाद, इस बार LJP(RV) ने गठबंधन के भीतर चुनाव लड़ा और अपने प्रदर्शन से गठबंधन की कुल संख्या को 200 के पार ले जाने में अहम भूमिका निभाई। इस शानदार प्रदर्शन के कारण, चिराग पासवान को एक बार फिर से “मोदी का हनुमान” बताया जा रहा है, जिन्होंने वोट ट्रांसफर को सुनिश्चित किया और NDA की प्रचंड जीत में “फिनिशर” की भूमिका निभाई।
बढ़ी हुई राजनीतिक हैसियत
LJP(RV) के इस मजबूत प्रदर्शन ने NDA के भीतर चिराग पासवान की सौदेबाजी की शक्ति और राजनीतिक कद को बढ़ाया है। भले ही NDA ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि नीतीश कुमार ही अगले मुख्यमंत्री होंगे, लेकिन चिराग पासवान अब गठबंधन के भीतर भाजपा और JDU के बाद तीसरी सबसे बड़ी पार्टी के नेता के रूप में उभरे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि उनका यह उदय न केवल बिहार की गठबंधन राजनीति के आंतरिक समीकरणों को बदलेगा, बल्कि भविष्य की राजनीति में उन्हें एक महत्वपूर्ण निर्णय लेने वाले नेता के रूप में भी स्थापित करेगा। अब देखना यह होगा कि क्या चिराग पासवान इस नई ताकत का उपयोग करते हुए उपमुख्यमंत्री पद की दावेदारी करते हैं या केंद्र में अपनी वर्तमान जिम्मेदारी को ही प्राथमिकता देते हैं।
