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श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में हुए भीषण धमाके में कम से कम नौ लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए। यह हादसा उस समय हुआ जब पुलिस और फॉरेंसिक टीम उस विस्फोटक सामग्री की जांच कर रही थी जिसे हाल ही में हरियाणा के फरीदाबाद से ज़ब्त किया गया था। अधिकारियों ने इस घटना को दुर्घटना बताया है।
विस्फोटक को नौगाम थाने क्यों लाया गया?
फरीदाबाद से बरामद भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री को श्रीनगर के नौगाम पुलिस स्टेशन में रखा गया था क्योंकि यह थाना ही उस आतंकी मॉड्यूल से जुड़े प्राथमिक मामले (FIR No. 162/2025) को संभाल रहा था।
मूल मामला: यह मामला तब शुरू हुआ जब अक्टूबर में नौगाम के बनपोरा इलाके में पुलिस और सुरक्षा बलों को धमकी भरे पोस्टर मिले थे।
इंटर-स्टेट मॉड्यूल: जांच में जम्मू-कश्मीर पुलिस को एक ‘व्हाइट-कॉलर’ जैश-ए-मोहम्मद (JeM) आतंकी मॉड्यूल का पता चला, जिसका नेटवर्क हरियाणा के फरीदाबाद और उत्तर प्रदेश तक फैला हुआ था।
फरीदाबाद में ज़ब्ती: इस जांच के सिलसिले में फरीदाबाद से डॉ. मुजम्मिल गनई समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था। गनई के किराए के आवास से लगभग 360 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट सहित 2,900 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री और रसायन ज़ब्त किए गए थे।
नमूना जांच: मानक प्रक्रिया के तहत, ज़ब्त किए गए विस्फोटक और रसायनों के नमूने फॉरेंसिक और रासायनिक जांच के लिए भेजे जाने थे। भारी मात्रा में सामग्री होने के कारण, सामग्री को अलग करने और नमूना लेने की प्रक्रिया नौगाम पुलिस स्टेशन में चल रही थी, जिसे एक खुले क्षेत्र में सुरक्षित रखा गया था।
धमाके का कारण
पुलिस महानिदेशक (DGP) ने पुष्टि की है कि धमाका अस्थिर और संवेदनशील प्रकृति के विस्फोटक पदार्थों के कारण हुई एक दुर्घटना थी। यह दुर्घटना शुक्रवार देर रात उस समय हुई जब फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की टीम पुलिस और राजस्व अधिकारियों के साथ मिलकर इन ज़ब्त किए गए पदार्थों की जांच और नमूना लेने का काम कर रही थी।
नौगाम पुलिस स्टेशन में हुई यह त्रासदी, एक बड़े आतंकी षड्यंत्र को नाकाम करने के लिए चल रही जांच का दुर्भाग्यपूर्ण परिणाम है।
