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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को जनजातीय गौरव दिवस के अवसर पर भाषण देते हुए आदिवासी समुदाय को भारत की चेतना का “अविभाज्य हिस्सा” बताया। उन्होंने कहा कि देश के सम्मान, आत्म-सम्मान और स्व-शासन के सवाल पर जनजातीय समाज हमेशा अग्रिम पंक्ति में खड़ा रहा है।
मोदी ने स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासियों के योगदान को न भूलने की बात कही और कांग्रेस पर छह दशकों तक उनकी उपेक्षा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस शासन के दौरान पोषण की कमी, अशिक्षा और बुनियादी सुविधाओं की कमी “जनजातीय इलाकों की दुर्भाग्यपूर्ण पहचान” बन गई थी।
प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की उन पहलों का भी ज़िक्र किया, जिनका मकसद जनजातीय समुदाय को सशक्त बनाना है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने शिक्षा, स्वास्थ्य और आर्थिक विकास में निवेश बढ़ाया है।
मोदी ने कांग्रेस पर आरोप लगाया कि उसने उन आदिवासी नायकों और सामुदायिक योगदानों की अस्वीकार्यता को बरकरार रखा, जिन्हें इतिहास में उचित मान्यता नहीं मिली। उन्होंने यह भी कहा कि 2014 के बाद उनकी सरकार ने आदिवासी नेताओं को राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा दिया और उनकी गौरव-गाथाओं को फिर से सम्मान दिलाया।
प्रधानमंत्री ने यह भरोसा दिलाया कि उनकी सरकार जनजातीय भाइयों और बहनों के साथ अन्याय को समाप्त करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है।
