Source The economics Times
नई दिल्ली: एक हालिया आर्थिक रिपोर्ट के अनुसार, देश में रिटेल महंगाई (CPI) आने वाले महीनों में सोने की कीमतों को छोड़कर नकारात्मक क्षेत्र में बनी रह सकती है। कमजोर मांग, खाद्य कीमतों में नरमी और विनिर्माण लागत में कमी के कारण सामान्य महंगाई दबाव काफी कम हुआ है। हालांकि, सोने की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी कुल CPI को ऊपर खींच रही है, जिससे भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) के सामने नीति निर्धारण को लेकर नई चुनौती खड़ी हो गई है।
सोना बना CPI में ‘असामान्य कारक’
रिपोर्ट के अनुसार, खाद्य और ईंधन जैसे प्रमुख वर्गों में कीमतें स्थिर होने के बावजूद सोने में तेज़ उछाल एक distortion की तरह काम कर रहा है। यदि सोने को शामिल न किया जाए, तो रिटेल महंगाई शून्य से नीचे रह सकती है, जो दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था में उपभोक्ता स्तर पर मांग अभी भी कमजोर है।
RBI के लिए मुश्किल परिस्थिति
RBI फिलहाल 4% के महंगाई लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए ब्याज दरों को स्थिर रखे हुए है, लेकिन नकारात्मक महंगाई और कमजोर मांग आर्थिक वृद्धि के लिए चिंता पैदा कर सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि
ब्याज दरों में कटौती से आर्थिक गतिविधियों को सहारा मिल सकता है,
लेकिन सोने की बढ़ती कीमतों के कारण हेडलाइन इन्फ्लेशन बढ़ने का जोखिम बना रहेगा।
उपभोक्ता खर्च अब भी दबाव में
रिपोर्ट यह भी बताती है कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में उपभोक्ता खर्च अपेक्षित तेजी नहीं पकड़ पाया है। कमजोर मांग से कंपनियों के लिए कीमतें बढ़ाना मुश्किल हो रहा है, जिसका सीधे असर CPI पर दिख रहा है।
आगे की राह
आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि RBI को अगले कुछ महीनों तक हेडलाइन और कोर इन्फ्लेशन के बीच संतुलन बनाकर नीति तैयार करनी होगी। यदि गैर-सोना CPI लगातार नकारात्मक रहा, तो केंद्रीय बैंक को विकास को बढ़ावा देने के लिए दरों में नरमी लाने पर विचार करना पड़ सकता है।
