Source The New Indian Express
पटना/सिंगापुर: राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को किडनी दान करने वाली उनकी बेटी रोहिणी आचार्य ने परिवार और पार्टी के भीतर गंभीर कलह के चलते अपमान और भावनात्मक पीड़ा व्यक्त की है। हालिया सोशल मीडिया पोस्ट्स में, रोहिणी ने आरोप लगाया है कि उन्हें ‘गंदी किडनी दान’ करने के लिए अपशब्द कहे गए और यहां तक कि कथित तौर पर पैसे या पार्टी टिकट के बदले किडनी दान करने का झूठा आरोप लगाकर उन्हें जलील किया गया।
रोहिणी आचार्य ने शनिवार को एक भावुक पोस्ट में खुलासा किया कि उन्हें “गंदी गालियां दी गईं, मारने के लिए चप्पल उठाया गया।” उन्होंने यह भी लिखा कि उन्हें अपने रोते हुए माता-पिता और बहनों को छोड़कर मायके से दूर होना पड़ा, जिसके बाद उन्हें ऐसा महसूस हुआ कि उन्हें “अनाथ बना दिया गया” है। उन्होंने यह भी कहा, “आप सब मेरे रास्ते कभी ना चलें, किसी घर में रोहिणी जैसी बेटी-बहन पैदा ना हो।”
लालू परिवार में बढ़ा विवाद
रोहिणी आचार्य ने 2022 में अपने पिता लालू यादव को अपनी एक किडनी दान की थी, जिसकी देशभर में तारीफ हुई थी। हालांकि, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में RJD की हार के बाद, रोहिणी ने खुलकर पार्टी और परिवार के अंदरूनी विवादों पर निशाना साधना शुरू कर दिया। उनके निशाने पर मुख्य रूप से तेजस्वी यादव के करीबी माने जाने वाले सलाहकार संजय यादव और रमीज नेमत रहे हैं।
रोहिणी ने अपनी पोस्ट में कहा कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और परिवार से भी नाता तोड़ रही हैं क्योंकि उन्हें इन लोगों ने परिवार से बाहर कर दिया है और हार की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते। यह घटनाक्रम लालू परिवार के भीतर चल रही खींचतान को सार्वजनिक रूप से सामने लाया है।
विरोधियों के आरोप और पलटवार
इससे पहले भी, रोहिणी के किडनी दान पर सवाल उठाए गए थे, जिस पर उन्होंने विरोधियों को खुली चुनौती दी थी। कुछ राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया था कि किडनी दान के पीछे उनका मकसद राजनीतिक टिकट या अन्य लाभ प्राप्त करना था, जिसे रोहिणी और उनके भाई तेजस्वी यादव ने बीजेपी की संस्कृति बताकर खारिज कर दिया था।
मौजूदा विवाद पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने भी सवाल उठाए हैं और लालू प्रसाद यादव की चुप्पी पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि उन्हें ‘धृतराष्ट्र’ की तरह व्यवहार नहीं करना चाहिए। रोहिणी आचार्य के इस खुलासे ने बिहार की राजनीति में एक बार फिर भूचाल ला दिया है, और यह RJD के भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है।
