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ढाका/नई दिल्ली: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार भारत में रह रहीं अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण के लिए अंतरराष्ट्रीय पुलिस संस्था इंटरपोल की सहायता लेने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ढाका इस संबंध में नई दिल्ली को औपचारिक अनुरोध पत्र (formal request letter) भेजने की तैयारी कर रहा है।
हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान कमाल को हाल ही में बांग्लादेश के अंतर्राष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण (ICT) ने देश में हुए जुलाई-अगस्त 2024 के विरोध प्रदर्शनों के दौरान ‘मानवता के खिलाफ अपराधों’ के लिए उनकी अनुपस्थिति में मौत की सज़ा सुनाई है।
📝 इंटरपोल ‘रेड नोटिस’ की तैयारी
रिपोर्ट्स के अनुसार, मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार अब दोनों भगोड़े नेताओं को वापस लाने की प्रक्रिया तेज कर रही है। आईसीटी के अभियोजक गाजी एमएच तमीम ने कहा है कि दोषसिद्धि वारंट (conviction warrant) के आधार पर इंटरपोल से रेड कॉर्नर नोटिस जारी करने का अनुरोध करने की तैयारी चल रही है।
न्यायाधिकरण के अनुसार, दोनों आरोपी फरार हैं और उन्हें अपील करने के लिए 30 दिनों के भीतर आत्मसमर्पण करना होगा।
बांग्लादेश का विदेश मंत्रालय इस संबंध में भारत सरकार को एक राजनयिक औपचारिक पत्र (note verbale) भेजने पर काम कर रहा है।
🇮🇳 भारत और प्रत्यर्पण संधि
शेख हसीना, जिन्हें पिछले साल बड़े पैमाने पर हुए विद्रोह के बाद सत्ता से बेदखल कर दिया गया था, 5 अगस्त 2024 से ही भारत में शरण लिए हुए हैं।
बांग्लादेश, भारत के साथ हुई 2013 की प्रत्यर्पण संधि (Extradition Treaty) का हवाला देते हुए हसीना को सौंपने की मांग कर रहा है। हालांकि, इस संधि में एक प्रावधान है जो भारत को प्रत्यर्पण अनुरोध को अस्वीकार करने की अनुमति देता है यदि उसे लगता है कि अनुरोध ‘राजनीतिक प्रकृति’ का है।
भारत के विदेश मंत्रालय ने न्यायाधिकरण के फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वह बांग्लादेश के लोगों के सर्वोत्तम हितों, शांति, लोकतंत्र और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है और सभी हितधारकों के साथ रचनात्मक रूप से जुड़ा रहेगा। नई दिल्ली ने इस मामले पर अभी तक कोई सीधा जवाब नहीं दिया है। जानकारों का मानना है कि हसीना का मामला कानूनी और राजनीतिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में आता है।
