SOURCE The Indian Express
नई दिल्ली: खगोलविदों ने एक अभूतपूर्व उपलब्धि हासिल की है, जिसमें पृथ्वी-आधारित दूरबीनों का उपयोग करके लगभग 13 अरब साल पुराने एक संकेत का पता चला है। यह संकेत उस समय का है जब ब्रह्मांड अपने प्रारंभिक चरण में था, जिसे ‘कॉस्मिक डॉन’ या ‘ब्रह्मांडीय भोर’ के नाम से जाना जाता है। इस खोज को ब्रह्मांड के जन्म और प्रारंभिक विकास को समझने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
वैज्ञानिकों की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने उन्नत रेडियो दूरबीनों के माध्यम से इस सुदूर संकेत को पकड़ने में सफलता पाई है। यह संकेत प्रारंभिक आकाशगंगाओं और पहले सितारों के बनने से संबंधित है, जब ब्रह्मांड अभी भी अपने शिशु अवस्था में था और आज की तुलना में बहुत अलग दिख रहा था। इस खोज से हमें यह समझने में मदद मिलेगी कि कैसे पहले सितारे बने, उन्होंने कैसे ब्रह्मांड को रोशन किया, और कैसे धीरे-धीरे आज हम जिस जटिल ब्रह्मांड को देखते हैं, उसका निर्माण हुआ।
यह संकेत इतना पुराना है कि यह बिग बैंग के कुछ सौ मिलियन वर्षों के बाद ही उत्पन्न हुआ होगा। उस समय, ब्रह्मांड मुख्य रूप से हाइड्रोजन परमाणुओं से भरा हुआ था, और तारे बनने शुरू ही हुए थे, जिससे धीरे-धीरे इस ‘अंधेरे युग’ का अंत हुआ और ‘ब्रह्मांडीय भोर’ की शुरुआत हुई। इस संकेत का विश्लेषण करके, वैज्ञानिक प्रारंभिक ब्रह्मांड की भौतिकी और रसायन विज्ञान के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने की उम्मीद कर रहे हैं।
इस खोज से ब्रह्मांड विज्ञान के क्षेत्र में नए द्वार खुलने की उम्मीद है, जिससे हमें अपने ब्रह्मांड की उत्पत्ति और उसके विकास की कहानी को और गहराई से समझने में मदद मिलेगी। यह आधुनिक खगोल विज्ञान और इंजीनियरिंग की शक्ति का भी एक प्रमाण है कि कैसे हम अरबों प्रकाश वर्ष दूर से आने वाले सबसे कमजोर संकेतों को भी पकड़ सकते हैं।
