SOURCE Tech Explorist वैज्ञानिकों ने एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है — उन्होंने अब तक के सबसे भारी प्रोटॉन उत्सर्जक नाभिक की खोज की है, जिसका नाम एस्टेटिन-188 (Astatine-188) है। यह खोज नाभिकीय भौतिकी के क्षेत्र में एक अहम मोड़ मानी जा रही है।
यह दुर्लभ और अत्यंत अस्थिर समस्थानिक (isotope) प्रोटॉन उत्सर्जन की प्रक्रिया से विख्यात है, जिसमें एक प्रोटॉन नाभिक से बाहर निकलता है। एस्टेटिन-188 का यह गुण इसे विशेष बनाता है, क्योंकि इससे पहले इतने भारी नाभिक से प्रोटॉन उत्सर्जन नहीं देखा गया था।
इस खोज को यूरोप के GSI Helmholtz Centre for Heavy Ion Research में किया गया, जहां वैज्ञानिकों ने भारी आयन टकराव के जरिए इस समस्थानिक को तैयार किया। प्रयोगों से यह साबित हुआ कि Astatine-188 की जीवनावधि बेहद कम है और यह प्रोटॉन उत्सर्जन की प्रक्रिया के जरिए तेजी से विघटित होता है।
इस खोज के महत्व:
यह परमाणु बलों की प्रकृति और नाभिकीय स्थिरता को बेहतर समझने में मदद करेगी।
प्रोटॉन उत्सर्जन से जुड़े सिद्धांतों को परखने का अवसर मिलेगा।
यह भविष्य में मेडिकल इमेजिंग और कैंसर उपचार जैसे क्षेत्रों में संभावित अनुप्रयोगों के लिए उपयोगी हो सकता है, क्योंकि एस्टेटिन समस्थानिकों का रेडियोथेरेपी में प्रयोग पहले से होता आ रहा है।
वैज्ञानिक इस खोज को न्यूक्लियर फिजिक्स में एक क्रांतिकारी उपलब्धि मान रहे हैं और भविष्य में इससे जुड़े और भी प्रयोगों की तैयारी में हैं।
