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ह्यूस्टन, [2 July 2025] – अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर एक्सिओम मिशन (Ax-4) के चार सदस्यीय चालक दल ने सफलतापूर्वक वापसी की है और अब वे वहां अपने महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रयोगों पर फिर से काम शुरू कर रहे हैं। इस मिशन में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला भी शामिल हैं, जो भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
एक्सिओम मिशन 4 का सफल प्रक्षेपण 25 जून 2025 को फ्लोरिडा के कैनेडी स्पेस सेंटर से स्पेसएक्स फाल्कन 9 रॉकेट द्वारा किया गया था। इस मिशन में कमांडर पेगी व्हिट्सन, पायलट शुभांशु शुक्ला (भारत), मिशन विशेषज्ञ स्लावोश उज़्नांस्की (पोलैंड) और तिबोर कपु (हंगरी) शामिल हैं। यह मिशन भारत, पोलैंड और हंगरी के लिए 40 से अधिक वर्षों में पहली सरकारी प्रायोजित मानव अंतरिक्ष उड़ान का प्रतीक है।
अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर चालक दल विभिन्न प्रकार के वैज्ञानिक अध्ययनों और गतिविधियों में संलग्न है, जो 31 देशों का प्रतिनिधित्व करते हैं। इन प्रयोगों में कैंसर कोशिकाओं का अध्ययन, सूक्ष्मजीवों के विकास की निगरानी, मस्तिष्क में रक्त के प्रवाह की जांच और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में मांसपेशियों के स्वास्थ्य को बनाए रखने के तरीकों की खोज शामिल है।
भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला विशेष रूप से इसरो और भारतीय संस्थानों द्वारा विकसित प्रयोगों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जिसमें स्क्रीन के उपयोग के संज्ञानात्मक प्रभावों, सूक्ष्मजीव अनुकूलन, मांसपेशियों के शोष और सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में फसल लचीलेपन का अध्ययन शामिल है। उनके काम में नील हरित शैवाल के विकास का दस्तावेजीकरण और कंकाल की मांसपेशियों के क्षरण पर महत्वपूर्ण शोध करना भी शामिल है।
यह मिशन न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ा रहा है, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी बढ़ावा दे रहा है। अंतरिक्ष में इस तरह के संयुक्त प्रयास भविष्य की लंबी अवधि की मानवयुक्त मिशनों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करते हैं और पृथ्वी पर बीमारियों के उपचार, खाद्य उत्पादन और नई प्रौद्योगिकियों के उपयोग में भी मदद कर सकते हैं।
एक्सिओम मिशन 4 का चालक दल लगभग दो सप्ताह तक अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर रहेगा, जिसके दौरान वे अपने शोध, शैक्षिक आउटरीच और वाणिज्यिक गतिविधियों को जारी रखेंगे, और फिर पृथ्वी पर वापस आएंगे।
