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नई दिल्ली, 1 अक्टूबर 2025 — जलवायु एवं सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गितांजलि अंगमो ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को एक पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति से यह अपील की है कि उनके जनजातीय पृष्ठभूमि को देखते हुए वह लेह-लद्दाख की जनता और उनके पति की स्थिति को समझें। इस पत्र की प्रति उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह को भी भेजी है।
पत्र में गितांजलि ने आग्रह किया है कि सोनम वांगचुक को बिना शर्त रिहाई दी जाए क्योंकि वह एक शांतिपूर्ण गांधीवादी संघर्षकारी हैं, जो लद्दाख की जनता के लिए शिक्षा, जलवायु परिवर्तन व आत्मनिर्भरता जैसे विषय उठाते रहे हैं।
मुख्य बिंदु
गितांजलि ने बताया कि गिरफ्तारी के बाद से उन्हें अपने पति से कोई संवाद नहीं हो पाया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वांगचुक को उनका कपड़ा तक साथ ले जाने की अनुमति नहीं दी गई, और यह नहीं पता कि उन्हें नई व श्रवण सामग्री, दवाइयाँ मिल रही हैं या नहीं।
गितांजलि ने कहा है कि यह एक पूरी तरह बचाव-शिकार (witch hunt) है, जिसे पिछले चार वर्षों से धीमे ढंग से, और पिछले एक महीने में तीव्र रूप से लागू किया गया है।
पत्र में उन्होंने राष्ट्रपति मुर्मु से चार सवाल पूछे हैं — (1) क्या उन्हें अपने पति से मिलने या बात करने की अनुमति है, (2) गिरफ्तारी का कारण क्या है और उनकी कानूनी स्थिति क्या है, (3) उनकी वर्तमान स्थिति कैसी है, और (4) क्या शांतिपूर्ण अभिव्यक्ति, आंदोलन व आवाज उठाना अपराध है।
पृष्ठभूमि
सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत 26 सितंबर 2025 को लेह से गिरफ्तार किया गया था, हिंसक प्रदर्शनों को भड़काने के आरोप में।
उन्हें बाद में जोधपुर केंद्रीय जेल भेजा गया।
आरोपों के खिलाफ गितांजलि ने जोर देकर कहा है कि सोनम वांगचुक को गैर-राष्ट्रीय दिखाने की कोशिश की जा रही है, जबकि उनका आंदोलन संविधानिक, लोकतांत्रिक और शांति प्रिय है।
