Source The Hindu
हैदराबाद स्थित सेंटर फॉर सेल्युलर एंड मॉलिक्यूलर बायोलॉजी (CCMB) के वैज्ञानिकों ने चार्ल्स डार्विन द्वारा वर्णित ‘अभियोग्य रहस्य’ (Abominable Mystery) की गुत्थी सुलझाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। इस रहस्य का संबंध फूलदार पौधों (Angiosperms) के अचानक और तीव्र विकास से है, जिसने लंबे समय तक वैज्ञानिकों को उलझाए रखा है।
चार्ल्स डार्विन ने इस रहस्य का उल्लेख 1879 में एक पत्र में किया था, जहाँ उन्होंने यह सवाल उठाया था कि फूलदार पौधे पृथ्वी पर इतनी तेजी से और व्यापक रूप से कैसे फैल गए। अब, CCMB के शोधकर्ताओं ने सामान्य पाए जाने वाले पौधों के जीनोम की विस्तृत अध्ययन के बाद इस रहस्य से जुड़ा एक महत्वपूर्ण सुराग प्राप्त किया है।
शोधकर्ताओं ने पाया कि फूलों वाले पौधों के डीएनए में कुछ विशेष प्रकार के जीन ट्रांसपोज़न (Gene Transposition) की घटनाएं हुई थीं। इन जीनों के स्थान में परिवर्तन ने पौधों को तेजी से अनुकूलन और विविधता उत्पन्न करने में सहायता की, जिससे वे पृथ्वी के विभिन्न पारिस्थितिक तंत्रों में तेजी से फैल पाए।
वैज्ञानिकों की टीम और शोध की प्रक्रिया
यह शोध डॉ. सौरभ सिंह के नेतृत्व में हुआ, जिसमें जेनेटिक्स, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और इवोल्यूशनरी बायोलॉजी के विशेषज्ञ शामिल थे। टीम ने सैकड़ों पौधों की प्रजातियों का जीनोमिक विश्लेषण किया और पाया कि कुछ खास डीएनए अनुक्रमों में बार-बार परिवर्तन हुए, जिससे नई-नई किस्में विकसित होती गईं।
डॉ. सिंह ने बताया, “हमने यह पाया कि इन पौधों में एक तरह की ‘जीन कॉपी और पेस्ट’ प्रणाली काम करती है, जिससे वे नई परिस्थितियों में खुद को जल्दी ढाल लेते हैं। यही कारण रहा कि फूलदार पौधे इतने कम समय में पृथ्वी पर हावी हो सके।”
डार्विन का ‘अभियोग्य रहस्य’
डार्विन ने फूलों वाले पौधों के अचानक विस्फोटक विकास को “अभियोग्य रहस्य” कहा था क्योंकि उस समय के जीवाश्म रिकॉर्ड में इसका स्पष्ट प्रमाण नहीं था। यह रहस्य विकासवाद के सिद्धांत के लिए एक चुनौती बना रहा। अब CCMB की यह खोज इस रहस्य को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाने में मदद कर सकती है।
भविष्य की दिशा
यह शोध न केवल विकासवाद की समझ को गहरा करता है, बल्कि कृषि और पर्यावरणीय अनुसंधान में भी नई संभावनाएं खोलता है। यदि इन जीनोमिक प्रक्रियाओं को नियंत्रित किया जा सके, तो इससे अधिक उपज देने वाली और पर्यावरण के अनुकूल फसलें विकसित की जा सकती हैं।
निष्कर्ष
CCMB की यह खोज न केवल डार्विन के समय से चले आ रहे एक गूढ़ प्रश्न का उत्तर देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है, बल्कि यह भविष्य में पौधों की प्रजातिगत विविधता और अनुकूलन को लेकर नए द्वार भी खोल सकती है।
