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पडरौना, उत्तर प्रदेश: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में पेट से जुड़ी समस्याएं आम बात हो गई हैं। सीने में जलन (हार्टबर्न), अपच और एसिडिटी जैसी परेशानियों के लिए लोग बिना सोचे-समझे ओवर-द-काउंटर दवाएं ले लेते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि ये सामान्य दवाएं आपकी किडनी के लिए खतरनाक साबित हो सकती हैं? हालिया अध्ययनों और विशेषज्ञों की चेतावनियों ने इस गंभीर मुद्दे पर प्रकाश डाला है।
आम दवाएं, गंभीर परिणाम:
डॉक्टरों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPIs) जैसी दवाएं, जो एसिडिटी और हार्टबर्न के इलाज के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल की जाती हैं, लंबे समय तक लेने पर किडनी पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकती हैं। पडरौना के प्रमुख किडनी रोग विशेषज्ञ, डॉ. आर.के. सिंह बताते हैं, “पीपीआई (PPIs) जैसी दवाएं, जो पेट में एसिड उत्पादन को कम करती हैं, अगर लंबे समय तक बिना डॉक्टरी सलाह के ली जाएं तो यह किडनी की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं। हमने ऐसे कई मामले देखे हैं जहां पुरानी किडनी रोग का कारण इन दवाओं का अत्यधिक सेवन पाया गया।”
ये दवाएं एक्यूट इंटरस्टिशियल नेफ्राइटिस (Acute Interstitial Nephritis) नामक स्थिति पैदा कर सकती हैं, जिसमें किडनी के ट्यूबल में सूजन आ जाती है। यदि इसका समय पर इलाज न किया जाए, तो यह क्रॉनिक किडनी रोग (Chronic Kidney Disease) और अंततः किडनी फेल्योर का कारण बन सकता है।
किन दवाओं से सावधान रहें?
प्रोटॉन पंप इनहिबिटर (PPIs): ओमेप्राज़ोल, पैंटोप्राज़ोल, रेबेप्राज़ोल, लांसोप्राज़ोल, एस्मेप्राज़ोल जैसी दवाएं।
नॉन-स्टेरॉइडल एंटी-इन्फ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDs): आइबुप्रोफेन, नेप्रोक्सन, डिक्लोफेनाक जैसी दर्द निवारक दवाएं भी किडनी पर बुरा असर डाल सकती हैं, खासकर अगर पहले से कोई किडनी संबंधी समस्या हो।
लक्षणों को पहचानें:
किडनी की समस्या के शुरुआती लक्षण अक्सर अस्पष्ट होते हैं, लेकिन कुछ संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए:
पेशाब की आदतों में बदलाव
पैरों और टखनों में सूजन
थकान और कमजोरी
भूख न लगना
मांसपेशियों में ऐंठन
खुजली
क्या करें?
स्व-दवा से बचें: किसी भी दवा को लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
खुराक और अवधि का ध्यान रखें: डॉक्टर द्वारा बताई गई खुराक और अवधि का सख्ती से पालन करें।
नियमित जांच: यदि आप नियमित रूप से कोई दवा ले रहे हैं, तो अपने डॉक्टर से किडनी फंक्शन टेस्ट करवाने के बारे में पूछें।
स्वस्थ जीवनशैली: खूब पानी पिएं, संतुलित आहार लें और नियमित व्यायाम करें।
डॉ. सिंह सलाह देते हैं, “पेट की छोटी-मोटी समस्याओं के लिए तुरंत दवा लेने के बजाय, जीवनशैली में बदलाव लाने की कोशिश करें। ज्यादा फाइबर वाला भोजन करें, मसालेदार और तैलीय भोजन से बचें। अगर समस्या बनी रहती है, तो डॉक्टर से संपर्क करें और उन्हें अपनी पूरी मेडिकल हिस्ट्री के बारे में बताएं।”
किडनी हमारे शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसकी देखभाल करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। अगली बार जब आप एसिडिटी या हार्टबर्न के लिए दवा खरीदने जाएं, तो एक पल रुकें और सोचें कि क्या यह आपकी किडनी के लिए सुरक्षित है।
