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नई दिल्ली: भारत के आठ प्रमुख क्षेत्रों (कोर सेक्टर) की वृद्धि दर सितंबर में धीमी होकर 3% पर आ गई है। यह गिरावट मुख्य रूप से ऊर्जा उत्पादन में कमजोरी के कारण हुई है।
अगस्त में, इन आठ क्षेत्रों की वृद्धि दर 12.5% थी, जो पिछले महीने की तुलना में एक महत्वपूर्ण गिरावट दर्शाती है।
मुख्य कारण: ऊर्जा क्षेत्र का प्रदर्शन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में बिजली और कोयला जैसे प्रमुख ऊर्जा क्षेत्रों के उत्पादन में उल्लेखनीय कमी आई है।
बिजली उत्पादन में, मांग में कमी और मॉनसून के कारण उत्पन्न हुई अन्य बाधाओं के चलते गिरावट दर्ज की गई।
कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस के उत्पादन में भी कमी आई है, जो वैश्विक ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच चिंता का विषय है।
अन्य क्षेत्रों का प्रदर्शन
ऊर्जा क्षेत्रों के विपरीत, इस्पात और सीमेंट क्षेत्रों ने सितंबर में मजबूत प्रदर्शन जारी रखा, जो बुनियादी ढांचे और निर्माण गतिविधियों में निरंतर तेजी का संकेत देता है।
उर्वरक क्षेत्र की वृद्धि दर भी धीमी रही, संभवतः त्योहारी सीजन से पहले मांग में अस्थायी कमी के कारण।
आर्थिक निहितार्थ
कोर सेक्टर का धीमा प्रदर्शन व्यापक औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के लिए एक चेतावनी हो सकता है, क्योंकि कोर सेक्टर IIP का लगभग 40% हिस्सा बनाते हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह गिरावट अस्थायी है, लेकिन सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को महंगाई को नियंत्रित करने और आर्थिक विकास को बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
