Source The Hindu
नई दिल्ली, 12 मई 2025 — भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया संघर्षविराम के बावजूद सीमा पर जारी तनाव के मद्देनज़र प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में थलसेना, वायुसेना और नौसेना के प्रमुखों के साथ-साथ राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, गृह मंत्री अमित शाह और विदेश मंत्री एस. जयशंकर उपस्थित थे।
बैठक का मुख्य उद्देश्य 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद उत्पन्न सुरक्षा स्थिति की समीक्षा करना था, जिसमें 27 नागरिकों की मृत्यु हुई थी। इस हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के तहत पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी ठिकानों पर हवाई हमले किए थे, जिसमें भारत के अनुसार 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
हालांकि, संघर्षविराम की घोषणा के बावजूद दोनों देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है। भारत ने पाकिस्तान पर संघर्षविराम के उल्लंघन का आरोप लगाया है, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों का खंडन किया है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बैठक में सुरक्षा बलों की तैयारियों की समीक्षा की और नागरिक सुरक्षा उपायों को सुदृढ़ करने के निर्देश दिए। इसके तहत, गृह मंत्रालय और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने 7 मई को ‘ऑपरेशन अभ्यास’ नामक एक राष्ट्रव्यापी नागरिक सुरक्षा अभ्यास का आयोजन किया, जिसमें 244 जिलों में ब्लैकआउट, हवाई हमले के सायरन और आपातकालीन निकासी जैसे अभ्यास शामिल थे।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्षविराम की मध्यस्थता में भूमिका निभाई है। हालांकि, भारत ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान संघर्षविराम की घोषणा उच्चस्तरीय वार्ताओं और बैकचैनल कूटनीति का परिणाम है। हालांकि, सीमा पर जारी तनाव और दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास को देखते हुए दीर्घकालिक शांति की संभावना अभी भी अनिश्चित बनी हुई है।
सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि भारत अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाएगा और आतंकवाद के खिलाफ अपनी नीति में कोई ढील नहीं देगा।
