Source Hindustan Times
नई दिल्ली: भारत और रूस ने अपनी ‘विशेष और विशेषाधिकार प्राप्त रणनीतिक साझेदारी’ को और मजबूत करने की दिशा में एक बार फिर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। हाल ही में दोनों देशों के बीच हुई उच्च-स्तरीय बैठकों में, रक्षा सहयोग को और बढ़ाने पर जोर दिया गया है, खासकर ऐसे समय में जब भू-राजनीतिक परिस्थितियां लगातार बदल रही हैं।
मॉस्को में हुई बैठकों में, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने अपने रूसी समकक्ष के साथ द्विपक्षीय संबंधों और सुरक्षा सहयोग पर विस्तृत चर्चा की। इन वार्ताओं का मुख्य एजेंडा भारत और रूस के बीच रक्षा उद्योग सहयोग को मजबूत करना रहा।
बैठक के दौरान, दोनों देशों ने S-400 मिसाइल रक्षा प्रणाली की खरीद और उसके रखरखाव जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया। भारत ने 2018 में रूस से पांच S-400 मिसाइल रक्षा प्रणालियां खरीदने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इनमें से कुछ प्रणालियों की डिलीवरी हो चुकी है, जबकि बाकी पर काम चल रहा है।
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूस से तेल और हथियारों की खरीद को लेकर भारत पर दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि, भारत ने स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति और रक्षा खरीद पूरी तरह से उसके राष्ट्रीय हितों पर आधारित हैं और किसी तीसरे देश के दबाव में नहीं आती हैं।
भारत-रूस संबंध दशकों पुराने हैं और दोनों देश रक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे क्षेत्रों में एक-दूसरे के महत्वपूर्ण साझेदार रहे हैं। भारत और रूस के बीच इस साल के अंत में वार्षिक शिखर सम्मेलन होने की भी उम्मीद है, जिसमें रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी शामिल हो सकते हैं। इस दौरान दोनों देशों के बीच संबंधों को और मजबूत करने के लिए कई अहम समझौतों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।
यह बैठक भारत और रूस के बीच गहरे संबंधों और रणनीतिक साझेदारी का एक और प्रमाण है। दोनों देश मिलकर वैश्विक और क्षेत्रीय चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हैं और भविष्य में भी अपने सहयोग को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
