SOURCE MoneyControl
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिशें तेज हो गई हैं, क्योंकि 9 जुलाई की समय-सीमा नजदीक आ रही है। हालांकि दोनों देशों के नेताओं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच मजबूत निजी संबंध इस समझौते को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन कुछ प्रमुख मुद्दों पर मतभेद अभी भी बरकरार हैं।
व्हाइट हाउस ने हाल ही में पुष्टि की है कि अमेरिका और भारत एक व्यापार समझौते के ‘बहुत करीब’ हैं, और राष्ट्रपति ट्रंप ने स्वयं कई बार इस बात का जिक्र किया है कि जल्द ही ‘एक बड़ा’ समझौता होने वाला है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने ‘बेहद अच्छे संबंध’ पर भी जोर दिया है, जिसे इस डील को गति देने वाला एक प्रमुख कारक माना जा रहा है।
हालांकि, जमीन पर बातचीत उतनी आसान नहीं रही है। सूत्रों के अनुसार, भारत कुछ अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पादों के लिए अपने बाजारों को पूरी तरह से खोलने को लेकर अपने रुख पर अड़ा हुआ है। भारत का मानना है कि इससे उसके लाखों किसानों और डेयरी उत्पादकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। वहीं, अमेरिका भारत से टैरिफ कम करने और अपने उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच चाहता है।
9 जुलाई की तारीख इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इस दिन अमेरिकी जवाबी शुल्क लगाने की 90 दिनों की समय-सीमा समाप्त हो रही है, जिसे ट्रंप प्रशासन ने भारत सहित कुछ देशों पर लगाया था। यदि इस तारीख से पहले कोई समझौता नहीं होता है, तो भारतीय निर्यात पर 26% तक का अतिरिक्त शुल्क लगने की आशंका है, जिससे भारत के लिए व्यापारिक चुनौतियां बढ़ जाएंगी।
दोनों पक्षों के अधिकारी पिछले कई दिनों से गहन बातचीत में लगे हुए हैं, और उम्मीद की जा रही है कि एक अंतरिम समझौते की घोषणा जल्द ही हो सकती है। हालांकि, पूर्ण और व्यापक व्यापार समझौते के लिए अभी भी कुछ समय लग सकता है। जानकारों का मानना है कि 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए टैरिफ कटौती और बाजार पहुंच के मुद्दों पर और अधिक काम करने की आवश्यकता होगी।
फिलहाल, सभी की निगाहें मोदी और ट्रंप के बीच की दोस्ती और कूटनीति पर टिकी हैं कि क्या वे 9 जुलाई से पहले इन मतभेदों को सुलझाकर एक ऐसे समझौते पर पहुंच पाएंगे जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो।
