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नई दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) में भारतीय राजनयिक पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ के बयान पर भारत की तरफ से कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए उनके दावों को खारिज कर दिया। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत पर कई झूठे आरोप लगाए और एक बार फिर आतंकवाद का गुणगान किया। भारत की स्थायी मिशन की प्रथम सचिव पेटल गहलोत ने ‘राइट टू रिप्लाई’ का इस्तेमाल करते हुए पाकिस्तान को आईना दिखाया और आतंकवाद को अपनी विदेश नीति का केंद्र बिंदु बनाने के लिए उसकी आलोचना की।
गहलोत ने कहा कि इस सभा ने सुबह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के ‘बेतुके नाटक’ को देखा, जिन्होंने एक बार फिर आतंकवाद का महिमामंडन किया, जो उनकी विदेश नीति का केंद्रीय हिस्सा है।
पाकिस्तान के झूठ और आतंकी संगठनों का पर्दाफाश
पेटल गहलोत ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के “ऑपरेशन सिंदूर” को लेकर किए गए जीत के दावे का मज़ाक उड़ाया। उन्होंने कहा, “9 मई तक पाकिस्तान भारत पर और हमले करने की धमकी दे रहा था, लेकिन 10 मई को उसकी सेना ने सीधे हमसे लड़ाई बंद करने की अपील की। बीच में हुई घटना भारतीय सेनाओं द्वारा कई पाकिस्तानी एयरबेस को नष्ट करना था।” उन्होंने आगे कहा कि “अगर नष्ट हुए रनवे और जले हुए हैंगर जीत जैसे दिखते हैं, जैसा कि प्रधानमंत्री दावा कर रहे हैं, तो पाकिस्तान को इसका मज़ा लेने का स्वागत है।”
गहलोत ने पाकिस्तान को यह भी याद दिलाया कि कैसे उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में ‘द रेसिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) जैसे आतंकी संगठन का बचाव किया था, जो जम्मू-कश्मीर में पर्यटकों के नरसंहार के लिए जिम्मेदार था। उन्होंने पाकिस्तान के इस दावे को भी खारिज कर दिया कि कोई तीसरा पक्ष भारत और पाकिस्तान के बीच शांति स्थापित करने में शामिल था, और दोहराया कि सभी लंबित मुद्दे केवल द्विपक्षीय रूप से ही सुलझाए जाएंगे। उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर पाकिस्तान शांति को लेकर गंभीर है, तो उसे तुरंत अपने देश के सभी सक्रिय आतंकवादी संगठनों को बंद करना होगा और भारत में वांछित आतंकवादियों को सौंपना होगा।
कौन हैं राजनयिक पेटल गहलोत?
पेटल गहलोत भारतीय विदेश सेवा (IFS) की एक अधिकारी हैं, जो जुलाई 2023 से संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन में प्रथम सचिव के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से राजनीति विज्ञान में स्नातक और दिल्ली विश्वविद्यालय के लेडी श्रीराम कॉलेज से स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की है। इससे पहले उन्होंने विदेश मंत्रालय में और पेरिस तथा सैन फ्रांसिस्को स्थित भारतीय मिशन में विभिन्न पदों पर काम किया है।
