Source Deccan Herald
नई दिल्ली, 7 जून 2025: भारतीय नौसेना 18 जून को विशाखापत्तनम के नौसेना डॉकयार्ड में अपने पहले स्वदेश निर्मित एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वाटर क्राफ्ट (ASW-SWC), INS Arnala, का कमीशन करेगी। यह कदम पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी क्षमताओं के बीच भारत की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण है।
INS Arnala: स्वदेशी शक्ति का प्रतीक
INS Arnala, जिसे कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) द्वारा संयुक्त रूप से निर्मित किया गया है, भारतीय नौसेना के लिए एक महत्वपूर्ण स्वदेशी परियोजना है। इसमें 80% से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह युद्धपोत तटीय जल में पनडुब्बियों का पता लगाने, निगरानी, खदान बिछाने और खोज एवं बचाव अभियानों के लिए डिज़ाइन किया गया है। इसकी लंबाई 78 मीटर, चौड़ाई 11.36 मीटर और ड्राफ्ट 2.7 मीटर है, और यह 25 नॉट्स (लगभग 45 किमी/घंटा) की गति प्राप्त कर सकता है। इसमें हल्के टॉरपीडो, ASW रॉकेट, खदानें, 30 मिमी की बंदूक और 12.7 मिमी की रिमोट कंट्रोल गन जैसी आधुनिक हथियार प्रणालियाँ हैं।
पाकिस्तान की पनडुब्बी क्षमताओं में वृद्धि
पाकिस्तान ने हाल ही में चीन के सहयोग से आठ Hangor-क्लास पनडुब्बियों के निर्माण की योजना बनाई है, जो एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक से लैस होंगी। ये पनडुब्बियाँ 2030 के दशक की शुरुआत में पाकिस्तान नौसेना में शामिल हो सकती हैं, जिससे उसकी पनडुब्बी शक्ति में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। इससे भारत के लिए समुद्र में अपनी रणनीतिक स्थिति बनाए रखना और भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
भारत की प्रतिक्रिया: समुद्री सुरक्षा को मजबूत करना
भारत ने पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी क्षमताओं के जवाब में अपनी नौसेना को मजबूत करने की दिशा में कई कदम उठाए हैं। INS Arnala का कमीशनिंग इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इसके अलावा, भारत ने INS Vagsheer जैसी आधुनिक पनडुब्बियाँ भी शामिल की हैं, जो Scorpene-क्लास पर आधारित हैं और पनडुब्बी युद्ध में भारत की क्षमताओं को बढ़ाती हैं। इसके साथ ही, भारत ने फ्रांस से 26 राफेल-M (मरीन) विमानों की खरीद को मंजूरी दी है, जो INS Vikrant जैसे स्वदेशी विमानवाहक पोतों पर तैनात किए जाएंगे।
निष्कर्ष
INS Arnala का कमीशनिंग भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण क्षमता और समुद्री सुरक्षा में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। पाकिस्तान की बढ़ती पनडुब्बी क्षमताओं के मद्देनजर, भारत की यह पहल समुद्र में अपनी रणनीतिक स्थिति को मजबूत करने और क्षेत्रीय सुरक्षा में संतुलन बनाए रखने के लिए आवश्यक है।
