Source-Deccan Herald
नई दिल्ली: भारत की अग्रणी घरेलू विमान सेवा कंपनी इंडिगो (IndiGo) के सह-संस्थापक ऋषि गंगवाल ने कंपनी में अपनी हिस्सेदारी में एक बार फिर बड़ी कटौती करते हुए लगभग ₹11,594 करोड़ रुपये मूल्य के शेयर बेच दिए हैं। यह सौदा ब्लॉक डील के जरिये किया गया, जिससे यह देश की कॉरपोरेट हिस्ट्री में सबसे बड़े व्यक्तिगत शेयर बिक्री सौदों में से एक बन गया है।
जानकारी के अनुसार, गंगवाल परिवार ने इंटरग्लोब एविएशन लिमिटेड — जो इंडिगो की पेरेंट कंपनी है — में अपनी हिस्सेदारी से करीब 14 करोड़ डॉलर के शेयर बाजार में बेचे हैं। यह सौदा टर्म शीट के माध्यम से सामने आया, जिसमें यह स्पष्ट किया गया कि यह रणनीतिक बिक्री है और इसका उद्देश्य पोर्टफोलियो विविधता को बढ़ाना और व्यक्तिगत निवेश की योजना को आगे बढ़ाना है।
ऋषि गंगवाल और राहुल भाटिया ने मिलकर 2006 में इंडिगो की स्थापना की थी। तब से यह कंपनी भारत में घरेलू उड्डयन क्षेत्र की प्रमुख खिलाड़ी बन चुकी है और आज देश की सबसे बड़ी एयरलाइन के रूप में स्थापित है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में गंगवाल और भाटिया के बीच मतभेदों की खबरें भी सामने आई थीं, जिनके चलते गंगवाल ने 2022 में कंपनी के बोर्ड से इस्तीफा दे दिया था और तब से वे धीरे-धीरे अपनी हिस्सेदारी कम कर रहे हैं।
यह हालिया सौदा उसी क्रम में एक और कदम है। मार्च 2022 में गंगवाल ने घोषणा की थी कि वह कुछ वर्षों के भीतर अपनी पूरी हिस्सेदारी बेच देंगे। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से गंगवाल अपनी रणनीतिक भूमिका से पूरी तरह बाहर निकलने की दिशा में बढ़ रहे हैं।
शेयर बाजार पर इस डील का तत्काल असर देखने को मिला। इंटरग्लोब एविएशन के शेयरों में मामूली उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया, लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी की मजबूत वित्तीय स्थिति, विमान बेड़े का विस्तार और बढ़ती बाजार हिस्सेदारी उसे दीर्घकालिक दृष्टिकोण में स्थिर बनाए रखेगी।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी हिस्सेदारी की बिक्री से निवेशकों के मन में चिंता उत्पन्न हो सकती है, लेकिन यह सौदा कंपनी के मूल ऑपरेशनों से जुड़ा नहीं है। यह एक व्यक्तिगत निवेश निर्णय है और इससे कंपनी की कार्यप्रणाली या विकास योजनाओं पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा।
इंडिगो ने इस साल कई नए अंतरराष्ट्रीय रूटों की घोषणा की है और एयरलाइन के संचालन विस्तार की योजना पर लगातार काम चल रहा है। कंपनी का ध्यान अब नए विमान शामिल करने और बाजार हिस्सेदारी को और मजबूत करने पर केंद्रित है।
