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नई दिल्ली: भारत के राष्ट्रपति द्वारा आयोजित एक विशेष समारोह में न्यायमूर्ति बी.आर. गवई ने मंगलवार को भारत के 52वें मुख्य न्यायाधीश (CJI) के रूप में शपथ ली। उन्होंने सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ का स्थान लिया।
न्यायमूर्ति गवई भारत के इतिहास में पहले बौद्ध और दूसरे दलित मुख्य न्यायाधीश बने हैं। इससे पहले न्यायमूर्ति के.जी. बालकृष्णन पहले दलित CJI रहे हैं। गवई की यह नियुक्ति भारतीय न्यायपालिका में सामाजिक समावेश और विविधता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
महाराष्ट्र के अमरावती जिले से ताल्लुक रखने वाले गवई का कानूनी करियर 1985 में बॉम्बे हाई कोर्ट में वकालत से शुरू हुआ। उन्होंने 2003 में बॉम्बे हाई कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाला और बाद में 2019 में सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश बने।
उनका कार्यकाल नवंबर 2025 तक रहेगा। न्यायमूर्ति गवई को सामाजिक न्याय, संवैधानिक कानून और मानवाधिकार मामलों में उनके निष्पक्ष और संवेदनशील दृष्टिकोण के लिए जाना जाता है।
देशभर में उनकी नियुक्ति का स्वागत हो रहा है, और यह सामाजिक प्रतिनिधित्व को न्यायपालिका के उच्चतम स्तर तक पहुंचाने की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम के रूप में देखा जा रहा है।
