Source The Hindu
एक नई वैज्ञानिक शोध में खुलासा हुआ है कि मलेरिया के दोबारा संक्रमण से शरीर में एक प्रकार की विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाएं (इम्यून सेल्स) बनती हैं, जो भविष्य में रोग से लड़ने में मदद कर सकती हैं। यह अध्ययन मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारी की रोकथाम और उसके टीकाकरण प्रयासों के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित हो सकता है।
यह शोध विश्व स्तर पर मलेरिया से प्रभावित क्षेत्रों में किए गए दीर्घकालिक अध्ययन पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने पाया कि जब किसी व्यक्ति को बार-बार मलेरिया होता है, तो उसके शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली एक विशेष प्रकार की “टिशू-रेजिडेंट मेमोरी टी सेल्स” (TRM cells) बनाती है। ये कोशिकाएं विशेष रूप से यकृत (लीवर) में सक्रिय होती हैं, जहां मलेरिया परजीवी का पहला चरण होता है।
शोधकर्ताओं का मानना है कि ये विशेष प्रतिरक्षा कोशिकाएं मलेरिया के खिलाफ स्थायी सुरक्षा प्रदान कर सकती हैं, और भविष्य के टीकों को इस खोज के आधार पर और अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
अध्ययन में शामिल प्रमुख वैज्ञानिक डॉ. अन्ना स्मिथ ने कहा, “हमने देखा कि जिन लोगों को पहले कई बार मलेरिया हुआ था, उनके शरीर में इन टी सेल्स की मौजूदगी अधिक थी और वे पुनः संक्रमण से बेहतर तरीके से लड़ सके।”
यह अध्ययन प्रतिष्ठित नैचर इम्युनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे मलेरिया उन्मूलन की दिशा में एक अहम प्रगति माना जा रहा है।
