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मंडला मर्डर्स रिव्यू: वैभव राज गुप्ता ने तोड़ी ‘गुल्लक’, वाणी कपूर के साथ एक ऐसी कहानी जो सितारों के लिए चली और चांद पर उतरी – 304 मिनट की शानदार प्रस्तुति!

Source Koimoi

नई दिल्ली: यशराज फिल्म्स और नेटफ्लिक्स की बहुप्रतीक्षित वेब सीरीज ‘मंडला मर्डर्स’ आखिरकार रिलीज़ हो गई है, और यह दर्शकों को एक गहरी, रहस्यमयी दुनिया में ले जाती है। वाणी कपूर के ओटीटी डेब्यू और ‘गुल्लक’ फेम वैभव राज गुप्ता के प्रभावशाली प्रदर्शन के साथ, यह सीरीज निश्चित रूप से चर्चा में है। हालांकि कुछ समीक्षकों ने इसकी जटिलता और धीमी गति पर सवाल उठाए हैं, लेकिन इसकी महत्वाकांक्षा और कलाकारों के दमदार अभिनय इसे एक बार देखने लायक बनाते हैं।

‘मंडला मर्डर्स’ चरणदासपुर नाम के एक रहस्यमयी गांव की कहानी है, जहां प्राचीन अनुष्ठानों और एक गुप्त समाज से जुड़ी क्रूर हत्याओं की एक श्रृंखला शुरू होती है। ये हत्याएं साधारण नहीं हैं; हर लाश से कोई न कोई अंग गायब होता है और उन पर एक अजीब निशान बना होता है, जो उन्हें एक प्राचीन ‘मंडल’ से जोड़ता है। इस उलझी हुई गुत्थी को सुलझाने के लिए सीआईबी अफसर रिया थॉमस (वाणी कपूर) और दिल्ली पुलिस के अधिकारी विक्रम सिंह (वैभव राज गुप्ता) को लगाया जाता है।

कहानी एक बाबा और एक रहस्यमयी मशीन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो लोगों की इच्छाएं पूरी करने का वादा करती है, लेकिन इसके बदले में एक भयावह बलिदान मांगती है – अंगूठा काटना। जैसे-जैसे हत्याओं का सिलसिला बढ़ता है, रिया और विक्रम को पता चलता है कि यह मामला उनके अपने अतीत से भी जुड़ा हुआ है।

वैभव राज गुप्ता, जो ‘गुल्लक’ में अपने हल्के-फुल्के किरदार से घर-घर में पहचाने जाते हैं, ने विक्रम सिंह के किरदार में अपनी बहुमुखी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। उनका किरदार बाहरी तौर पर सख्त दिखता है, लेकिन अंदर ही अंदर बहुत कुछ झेल रहा है, और वैभव ने इस भावनात्मक गहराई को बड़ी सादगी और कुशलता से निभाया है। उनकी आंखों में डर, गुस्सा और उलझन साफ नजर आती है, जो उन्हें दर्शकों से सबसे ज्यादा जोड़ती है।

वहीं, वाणी कपूर ने अपने ओटीटी डेब्यू में एक तेज-तर्रार डिटेक्टिव रिया थॉमस की भूमिका निभाई है। कुछ समीक्षकों को उनके भावनात्मक दृश्यों में थोड़ी कमी महसूस हुई है, लेकिन उन्होंने अपने किरदार को पूरी ईमानदारी से निभाया है और कहानी को मजबूती दी है। सुरवीन चावला, श्रेया पिलगांवकर और जमील खान जैसे सहायक कलाकारों ने भी अपने किरदारों में जान डाल दी है।

निर्देशक गोपी पुथरन और मनन रावत ने एक जटिल लेकिन आकर्षक दुनिया बनाई है, जो भारतीय पौराणिक कथाओं, सामाजिक-राजनीतिक टिप्पणियों और अपराध थ्रिलर को एक साथ पिरोने की कोशिश करती है। हालांकि कुछ स्थानों पर कहानी थोड़ी बिखरी हुई महसूस हो सकती है और रहस्यमयी तत्वों और विज्ञान के बीच का तालमेल कभी-कभी कमजोर पड़ जाता है, फिर भी सीरीज का माहौल, सिनेमैटोग्राफी और कलाकारों का प्रदर्शन इसे एक अलग स्तर पर ले जाते हैं।

कुल मिलाकर, ‘मंडला मर्डर्स’ एक महत्वाकांक्षी और गहरे रंग की थ्रिलर है जो आपको अंत तक बांधे रखती है। यदि आप धीमी गति से चलने वाले, सोचने पर मजबूर करने वाले रहस्य और दमदार अभिनय पसंद करते हैं, तो 304 मिनट की यह सीरीज आपको निराश नहीं करेगी। यह एक ऐसी कहानी है जो सितारों के लिए चली और अंततः दर्शकों के दिलों में चांद सी चमक छोड़ जाती है।

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