Source NDTV
मुंबई: टाटा समूह (Tata Group) के परोपकारी इकाई टाटा ट्रस्ट्स के भीतर जारी खींचतान के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। रतन टाटा के करीबी माने जाने वाले मेहली मिस्त्री ने ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा को एक पत्र लिखकर आधिकारिक तौर पर ट्रस्ट से अलग होने की घोषणा कर दी है। मिस्त्री का यह फैसला पिछले सप्ताह दो प्रमुख ट्रस्टों से उनकी पुनर्नियुक्ति को बहुमत से खारिज किए जाने के बाद आया है, जिससे उनके ट्रस्टी पद का कार्यकाल समाप्त हो गया था।
🕊️ “संस्था से बड़ा कोई नहीं”: रतन टाटा के विचारों का किया ज़िक्र
नोएल टाटा को लिखे अपने पत्र में मेहली मिस्त्री ने दिवंगत रतन एन. टाटा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया। मिस्त्री ने लिखा कि रतन टाटा की दृष्टि में ट्रस्टों को किसी भी विवाद से दूर रखना शामिल है, और उनका मानना है कि मामलों को और बढ़ाने से टाटा ट्रस्ट्स की प्रतिष्ठा को अपूरणीय क्षति पहुँच सकती है।
मिस्त्री ने यह भी आशा व्यक्त की कि अन्य ट्रस्टी भविष्य में पारदर्शिता, सुशासन और जनहित के सिद्धांतों से निर्देशित होंगे। पत्र का अंत उन्होंने रतन टाटा के एक प्रसिद्ध उद्धरण के साथ किया:
“कोई भी व्यक्ति उस संस्था से बड़ा नहीं है जिसकी वह सेवा करता है।”
📅 28 अक्टूबर से प्रभावी हुआ अलग होने का फैसला
मेहली मिस्त्री ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 28 अक्टूबर, 2025 तक टाटा ट्रस्ट्स के ट्रस्टी के रूप में सेवा करना उनके लिए सम्मान की बात थी। उन्होंने यह कदम मीडिया में चल रही अटकलों पर विराम लगाने और ट्रस्टों के हितों की रक्षा करने के लिए उठाया है। मिस्त्री का यह सद्भावपूर्ण निकास ऐसे समय में हुआ है जब कुछ रिपोर्टों में उनके द्वारा अपनी पदमुक्ति को कानूनी चुनौती देने की संभावना जताई जा रही थी।
यह घटनाक्रम भारत के सबसे बड़े परोपकारी संगठनों में से एक, टाटा ट्रस्ट्स, जो समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में 65.9% हिस्सेदारी रखता है, के शासन (governance) और नेतृत्व में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत देता है।
