Source The Indian Express
अंतरिक्ष से मिली बड़ी खबर! नासा (NASA) का महत्वपूर्ण अंतरिक्ष यान ‘यूरोपा क्लिपर’ (Europa Clipper) जो बृहस्पति (Jupiter) के बर्फीले चंद्रमा यूरोपा के अध्ययन के लिए अपने सफर पर है, जल्द ही एक रोमांचक और दुर्लभ खगोलीय घटना का सामना कर सकता है। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि यह यान हमारे सौरमंडल के बाहर से आए एक धूमकेतु (Comet) ‘3I/ATLAS’ की आयन (Ion) पूंछ के कुछ हिस्सों से होकर गुजर सकता है। यदि ऐसा होता है, तो यह एक अभूतपूर्व अवसर होगा, जिसके कारण वैज्ञानिक इस घटना पर बारीकी से नजर रखे हुए हैं
अंतरतारकीय मेहमान: धूमकेतु 3I/ATLAS (3I/ATLAS) कोई सामान्य अंतरिक्ष चट्टान नहीं है। यह एक अंतरतारकीय (Interstellar) धूमकेतु है, जिसका अर्थ है कि यह हमारे सौरमंडल में पैदा नहीं हुआ, बल्कि एक अन्य तारे के सिस्टम से आया है।
सीधा नमूना लेने का अवसर: वैज्ञानिकों को इस बात की बहुत कम जानकारी है कि ये बाहरी धूमकेतु कैसे बने हैं और उनके अंदर क्या है। धूमकेतु की पूंछ को पार करने से यूरोपा क्लिपर को उन आवेशित कणों (Charged Particles) को सीधे मापने का मौका मिल सकता है जो इस दूर के मेहमान से सौर हवा (Solar Wind) द्वारा अलग किए गए हैं।
ब्रह्मांड के रहस्य: वैज्ञानिक इसे “अन्य आकाशगंगा के एक हिस्से” का सीधा नमूना लेने का सबसे नज़दीकी तरीका मानते हैं। इस डेटा से उन्हें ब्रह्मांड के दूसरे हिस्सों में पाए जाने वाले रासायनिक पदार्थों और तारों के सिस्टम के निर्माण के बारे में अनमोल जानकारी मिल सकती है।
यूरोपा क्लिपर क्यों है खास?
यूरोपा क्लिपर मिशन का प्राथमिक उद्देश्य बृहस्पति के चंद्रमा यूरोपा का विस्तृत अध्ययन करना है।
जीवन की खोज: यूरोपा की बर्फीली सतह के नीचे एक खारे पानी का महासागर होने का प्रबल प्रमाण है, जिसमें पृथ्वी के सभी महासागरों से दोगुना पानी हो सकता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस महासागर में जीवन के लिए आवश्यक सभी तत्व – जल, ऊर्जा और रसायन मौजूद हो सकते हैं। क्लिपर यान यही पता लगाएगा कि क्या यूरोपा पर जीवन को सहारा देने वाली स्थितियाँ मौजूद हैं।
शक्तिशाली उपकरण: अंतरिक्ष यान पर लगे मैग्नेटोमीटर और प्लाज्मा इंस्ट्रूमेंट्स (Magnetometer and Plasma Instruments) मुख्य रूप से यूरोपा के चुंबकीय वातावरण और उसके महासागर का अध्ययन करने के लिए बनाए गए थे। अब, यही उपकरण धूमकेतु के कणों को भी पकड़ सकते हैं।
यह घटना, जो 30 अक्टूबर से 6 नवंबर के बीच होने का अनुमान है, यूरोपा क्लिपर के मिशन में एक अप्रत्याशित लेकिन असाधारण वैज्ञानिक आयाम जोड़ सकती है। भले ही यूरोपा क्लिपर इस अंतरतारकीय मेहमान के पास नहीं जा रहा, लेकिन धूमकेतु की पूंछ को पार करने का यह मौका वैज्ञानिकों के लिए किसी लॉटरी से कम नहीं है।
