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वाशिंगटन — यूएस-चीन इकोनॉमिक एंड सिक्योरिटी रिव्यू कमीशन की हालिया वार्षिक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि चीन ने मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के बाद फ्रांसीसी राफेल लड़ाकू विमानों को बदनाम करने के लिए व्यापक झूठा प्रचार (डिसइन्फॉर्मेशन) अभियान चलाया था।
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने अपनी समझदारी से नकली सोशल मीडिया अकाउंट बनाकर एआई-जनरेटेड (कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार) तस्वीरों का इस्तेमाल किया, जिनमें राफेल विमानों के कथित “मलबे” दिखाए गए — यह दावा किया गया कि ये मलबे चीन के हथियारों से नीचे गिराए गए थे।
राफेल की बिक्री प्रभावित करने की रणनीति
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ने इस अभियान का लक्ष्य राफेल की बिक्री को कमजोर करना और अपनी ही पाँचवीं पीढ़ी की जेट J-35 को बढ़ावा देना था। चीन ने कथित तौर पर अन्य देशों में भी राफेल खरीद को रोकने की कोशिश की — उदाहरण के लिए, अमेरिकी रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चीनी दूतावास के अधिकारियों ने इंडोनेशिया को राफेल खरीदने से मनाने की कोशिश की थी।
भारत-पाकिस्तान संघर्ष का फायदा उठाया गया
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन ने मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुई सीमा टकराव की स्थिति (ऑपरेशन सिंदूर) का “औपचारिक” अवसर अवसरवादी तरीके से इस्तेमाल किया, इस संघर्ष को यह दिखाने के लिए कि चीनी हथियार कितने सक्षम हैं।
पाकिस्तान के दावों पर सवाल
यह रिपोर्ट पाकिस्तान की उन दावों के खिलाफ भी है जिनमें उन्होंने कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में उन्होंने छह भारतीय जेट गिराए थे — कमीशन के अनुसार, रिपोर्ट तक यह स्पष्ट नहीं है कि सभी नीचे गिरे हुए विमान राफेल ही थे।
रक्षा सहयोग में बढ़ोतरी
रिपोर्ट ये भी रेखांकित करती है कि चीन और पाकिस्तान के बीच सैन्य सहयोग मई 2024 से बढ़ा है। इस दौरान दोनों देशों ने एक साथ अभ्यास आयोजित किए हैं, जिसे चीन ने चीन के हथियारों की क्षमता और बिक्री को बढ़ावा देने का एक मंच माना।
चीन की प्रतिक्रिया और नतीजे
चीन की इस कथित “डिसइन्फॉर्मेशन” रणनीति का नतीजा न सिर्फ राफेल की छवि पर असर डालना था, बल्कि वैश्विक रक्षा बाजार में चीन की पकड़ मजबूत करना भी था — जहां वह अपने J-35 जैसे विमान को बेचने की कोशिश कर रहा है।
विश्लेषकों का कहना है कि यह मामला केवल एक सैन्य झड़प तक सीमित नहीं है, बल्कि आज की लड़ाई एक सूचना युद्ध भी है, जहाँ झूठी तस्वीरों और सोशल मीडिया की ताकत का उपयोग करके देशों को गलत संदेश दिए जा रहे हैं।
