SOURCE Hindustan Times
पुणे, 15 July – पुणे पोर्शे दुर्घटना मामले में एक नया मोड़ आ गया है, जहां किशोर न्याय बोर्ड (JJB) ने आरोपी को नाबालिग के रूप में ही मानने का फैसला किया है। इस दुर्घटना में दो आईटी पेशेवरों की मौत हो गई थी, और इस मामले ने पूरे देश में व्यापक आक्रोश पैदा किया था।
यह फैसला बोर्ड द्वारा सभी सबूतों और परिस्थितियों की समीक्षा के बाद आया है, जिसमें आरोपी की मानसिक परिपक्वता का आकलन भी शामिल था। इससे पहले, पुलिस ने आरोपी पर वयस्क के रूप में मुकदमा चलाने का अनुरोध किया था, क्योंकि दुर्घटना की गंभीरता और आरोपी के कथित शराब के नशे में गाड़ी चलाने के कारण जनता में इसकी मांग थी।
सूत्रों के अनुसार, किशोर न्याय बोर्ड ने अपने फैसले में कहा है कि मौजूदा कानूनी प्रावधानों और आरोपी की उम्र के आधार पर उसे नाबालिग के रूप में ही देखा जाएगा। इसका मतलब है कि आरोपी पर किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के तहत मुकदमा चलाया जाएगा, न कि भारतीय दंड संहिता के तहत एक वयस्क के रूप में।
इस फैसले के बाद, पुलिस और अभियोजन पक्ष अब अपनी रणनीति पर विचार कर रहे हैं। इस बात की संभावना है कि वे इस फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती दे सकते हैं। इस घटना ने देश में किशोर न्याय प्रणाली और गंभीर अपराधों में शामिल नाबालिगों के इलाज को लेकर एक बार फिर बहस छेड़ दी है।
दुर्घटना 19 मई को पुणे के कल्याणी नगर में हुई थी, जब एक तेज रफ्तार पोर्शे कार ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इस दुर्घटना में अनीस अवधिया और अश्विनी कोस्टा की मौके पर ही मौत हो गई थी। घटना के बाद से ही इस मामले ने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर काफी सुर्खियां बटोरी हैं।
इस फैसले के बाद, पीड़ितों के परिवारों और आम जनता में निराशा का माहौल है, जो आरोपी के लिए कड़ी से कड़ी सजा की मांग कर रहे थे। अब यह देखना होगा कि इस मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जाते हैं।
