Source The Indian Express
[महादेवपुरा (बेंगलुरु)] – कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा हाल ही में बेंगलुरु में कथित ‘वोटर लिस्ट फ्रॉड’ को लेकर लगाए गए आरोपों का केंद्र रहे महादेवपुरा निर्वाचन क्षेत्र का एक पुराना विवाद सामने आया है। यह वही इलाका है जहां 2022 में भी वोटर लिस्ट में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा हंगामा हुआ था। उस समय, कई मतदाता संगठनों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि हजारों मतदाताओं के नाम बिना किसी सूचना के लिस्ट से हटा दिए गए थे, जिससे एक बड़े घोटाले की आशंका जताई गई थी।
राहुल गांधी ने हाल ही में आरोप लगाया कि इस क्षेत्र में मतदाता सूची के साथ छेड़छाड़ की गई है और लोगों को बहकाया गया है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र के लिए खतरा है और चुनाव आयोग को इस मामले की जांच करनी चाहिए।
2022 का विवाद: चिलुम-चीके के आरोप
2022 में, जब महादेवपुरा में मतदाता सूची को अपडेट किया जा रहा था, एक निजी संस्था ‘चिलुम ट्रस्ट’ को मतदाता जागरूकता का काम सौंपा गया था। हालांकि, बाद में यह आरोप लगा कि इस ट्रस्ट ने मतदाताओं की निजी जानकारी एकत्र की और फिर कुछ मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। इस मामले में एक बड़ा राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया था, जिसके बाद बेंगलुरु शहर के तत्कालीन आयुक्त को निलंबित कर दिया गया था।
अब क्या है स्थिति?
राहुल गांधी के मौजूदा आरोपों ने इस पुराने विवाद को फिर से जिंदा कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह एक सुनियोजित साजिश है ताकि एक विशेष वर्ग के मतदाताओं को मतदान करने से रोका जा सके। उन्होंने चुनाव आयोग से इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने की मांग की है।
इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है। बीजेपी का कहना है कि यह कांग्रेस की हार की हताशा है और राहुल गांधी बिना किसी सबूत के निराधार आरोप लगा रहे हैं।
यह देखना दिलचस्प होगा कि चुनाव आयोग इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या महादेवपुरा का पुराना विवाद फिर से एक नया राजनीतिक युद्ध का मैदान बन जाएगा।
