Source Reuters
भारतीय रुपया गुरुवार को विदेशी मुद्रा बाजार में लगभग स्थिर बंद हुआ। पूरे सत्र के दौरान मुद्रा पर आयातकों और निर्यातकों के विपरीत प्रवाहों का मिश्रित प्रभाव देखा गया, जिसके चलते रुपये ने सीमित दायरे में कारोबार किया। विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक संकेतों के साथ-साथ घरेलू बाजार में भी निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया, जिससे रुपये में तेज उतार-चढ़ाव नहीं देखने को मिला।
ट्रेडिंग के दौरान रुपये ने अधिकांश समय डॉलर के मुकाबले सीमित बैंड में उतार-चढ़ाव किया। आयातकों द्वारा डॉलर की मांग में बढ़ोतरी से रुपये पर दबाव बना, जबकि निर्यातकों द्वारा डॉलर बेचने की रुचि ने इसे सहारा दिया। दोनों ओर के प्रवाह एक-दूसरे को संतुलित करते दिखे, जिसके परिणामस्वरूप रुपये की चाल लगभग सपाट रही।
बाजार विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स में हल्की मजबूती दिखी, लेकिन यह इतनी नहीं थी कि घरेलू मुद्रा पर बड़े प्रभाव डाल सके। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में हलचल जैसे कारक भी निवेशकों के मनोभाव पर असर डालते रहे। हालांकि, भारतीय इक्विटी बाजारों में स्थिरता और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) की चुनिंदा श्रेणियों में सीमित खरीदारी ने रुपये को समर्थन दिया।
एशियाई मुद्राओं की बात करें तो अधिकांश करेंसीज में हल्की गिरावट रही, लेकिन भारतीय रुपये ने अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन किया। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की समय-समय पर की जाने वाली डॉलर बिक्री भी रुपये में स्थिरता बनाए रखने में मददगार रही। हालांकि, यह हस्तक्षेप अनौपचारिक और जरूरत के अनुसार होता है, इसलिए इसके प्रभाव हमेशा स्पष्ट नहीं होते।
इसके अलावा कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव भी रुपये की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। हाल के दिनों में तेल कीमतों में सीमित बढ़त ने आयात बिल पर अधिक दबाव नहीं डाला, जो रुपये के लिए राहत का कारक रहा।
आगे की दिशा पर विशेषज्ञों का मानना है कि रुपये की चाल वैश्विक आर्थिक संकेतकों, भू-राजनीतिक घटनाक्रमों और घरेलू डेटा पर निर्भर करेगी। निकट भविष्य में रुपये में बड़े उतार-चढ़ाव की संभावना कम है, और यह सीमित दायरे में कारोबार जारी रख सकता है।
बाजार फिलहाल अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों, फेड के अगले संकेतों और डॉलर की वैश्विक स्थिति पर नजर बनाए हुए है। निवेशक उम्मीद कर रहे हैं कि यदि वैश्विक वातावरण स्थिर रहता है तो भारतीय रुपया अपनी वर्तमान मजबूती बनाए रख सकता है।
