Source Mint
नई दिल्ली: भारतीय रुपये की गिरावट का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मंगलवार को अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार (forex market) में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 5 पैसे कमजोर होकर अपने अब तक के सबसे निचले स्तर 88.80 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। यह रुपये का नया ऐतिहासिक निचला स्तर है।
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में यह गिरावट मुख्य रूप से अमेरिका-भारत के बीच बढ़ते व्यापारिक तनाव और अमेरिकी डॉलर की बढ़ती मांग के कारण आई है। इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) द्वारा भारतीय पूंजी बाजार से लगातार फंड की निकासी और कुछ वैश्विक अनिश्चितताएं भी रुपये पर दबाव डाल रही हैं।
इससे पहले रुपया अपने पिछले रिकॉर्ड निचले स्तर को तोड़ते हुए 88.80 के स्तर तक पहुंच गया, जिसने बाजार में चिंता बढ़ा दी है। विदेशी मुद्रा डीलरों ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की कड़ी निगरानी के बावजूद, रुपये पर वैश्विक कारकों का असर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।
रुपये के कमजोर होने से आयातित वस्तुएं, जैसे कि कच्चा तेल (crude oil) और इलेक्ट्रॉनिक सामान, महंगे हो जाएंगे, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ सकता है। साथ ही, विदेश में पढ़ाई और यात्रा करना भी महंगा हो जाएगा। हालांकि, निर्यातकों को इससे लाभ होने की उम्मीद है।
बाजार की नजर अब RBI के अगले कदमों और वैश्विक व्यापारिक घटनाक्रमों पर टिकी है।
